भारतीय क्रिकेट का इंजरी संकट : क्या है सच? वीवीएस लक्ष्मण ने खोली तालमेल की पोल
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भारतीय टीम में लगातार बढ़ती चोटों की संख्या और खिलाड़ियों के रिहैब को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) के हेड वीवीएस लक्ष्मण ने चुप्पी तोड़ी है। बेंगलुरु में हुई एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक के बाद उन्होंने BCCI, टीम मैनेजमेंट और चयनकर्ताओं के बीच किसी भी तरह के मतभेद से इनकार किया है।

उच्च स्तरीय बैठक में क्या हुआ? रविवार, 9 अगस्त 2026 को बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में एक अहम बैठक हुई। इसमें BCCI सचिव देवजीत सैकिया, वीवीएस लक्ष्मण, मुख्य कोच गौतम गंभीर (ऑनलाइन) और चयन समिति के अध्यक्ष अजीत अगरकर शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य खिलाड़ियों की फिटनेस और रिकवरी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना था।

क्या तालमेल में कोई कमी है? लक्ष्मण ने स्पष्ट किया कि खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर कोई भी गलतफहमी नहीं है। उन्होंने कहा, CoE, टीम मैनेजर, डॉक्टर, फिजियो और चयनकर्ता एक टीम की तरह काम कर रहे हैं। यदि कोई खिलाड़ी उम्मीद के मुताबिक रिकवर नहीं हो पाता, तो हम सीधे मुख्य कोच और चयनकर्ता से बात करते हैं। खिलाड़ी भी यह समझते हैं कि मैच फिटनेस से समझौता नहीं किया जा सकता।

वर्कलोड पर लक्ष्मण का बेबाक बयान खिलाड़ियों के बढ़ते वर्कलोड पर उठ रहे सवालों पर लक्ष्मण ने कहा कि यह चिंता का विषय नहीं, बल्कि एलीट स्तर का हिस्सा है। उन्होंने माना कि आज के दौर में तीनों फॉर्मेट खेलने के कारण खिलाड़ियों पर दबाव अधिक है, लेकिन उन्होंने तर्क दिया कि कड़ी मेहनत और सही प्रक्रियाओं से इसे मैनेज किया जा सकता है।

चोट लगना खेल का हिस्सा चोटों को लेकर लक्ष्मण का नजरिया काफी स्पष्ट रहा। उन्होंने कहा कि अगर कोई खिलाड़ी पूरी क्षमता से खेल रहा है, तो चोट लगने की संभावना बनी रहती है। उन्होंने कहा, अगर आप यह सोचकर मैदान पर उतरते हैं कि मुझे चोट न लगे, तो इसका मतलब है कि आप अपनी पूरी ताकत से नहीं खेल रहे हैं। चोट को नकारात्मक रूप में नहीं, बल्कि खेल के एक स्वाभाविक हिस्से के रूप में देखने की जरूरत है।

भविष्य की रणनीति CoE ने अब खिलाड़ियों की देखभाल की प्रक्रियाओं में बड़े बदलाव किए हैं। लक्ष्मण के अनुसार, ये पहल केवल अनुबंधित खिलाड़ियों के लिए ही नहीं, बल्कि राज्य स्तर के खिलाड़ियों के लिए भी फायदेमंद साबित होगी। उनका जोर इस बात पर है कि रिकवरी प्रोसेस को और बेहतर बनाया जाए ताकि खिलाड़ियों का करियर लंबा और सुरक्षित रहे।

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