बारामती रनवे बना हादसों का अड्डा : फिर बाल-बाल बचा विमान, सुरक्षा मानकों पर फूटा स्थानीय प्रशासन का गुस्सा
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पुणे के बारामती हवाई अड्डे पर रविवार दोपहर एक बड़ा विमान हादसा टल गया। एक निजी विमानन कंपनी का प्रशिक्षण विमान (ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट) टेक-ऑफ के दौरान रनवे से फिसलकर बाहर निकल गया। हालांकि, इस घटना में विमान में सवार दोनों पायलट सुरक्षित हैं, लेकिन इसने एक बार फिर इस एयरपोर्ट की सुरक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कैसे हुआ हादसा? पुणे रूरल के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी संदीप सिंह गिल के अनुसार, घटना दोपहर करीब 12:35 बजे हुई। प्रशिक्षण विमान (VT-SEX) अभ्यास उड़ान पर था। कैप्टन चिराग शशिकांत डोइफोडे और कैडेट अभिजीत जुंद्रे विमान में सवार थे।

पहला टेक-ऑफ प्रयास विफल होने के बाद जब दोबारा कोशिश की गई, तो पायलट विमान पर नियंत्रण खो बैठे। विमान रनवे की तय सीमा को पार कर गया और बगल की पक्की सतह पर जाकर रुका। गनीमत रही कि विमान में आग नहीं लगी और कोई जनहानि नहीं हुई।

अतीत का खौफनाक मंशा बारामती एयरपोर्ट का इतिहास हादसों से भरा रहा है। सबसे दुखद घटना इसी साल 28 जनवरी को हुई थी, जब एक लीयरजेट 45 विमान क्रैश हो गया था। उस दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में पूर्व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार, उनके निजी सुरक्षा अधिकारी, सहायक और दोनों पायलटों की मौत हो गई थी।

जांच एजेंसी (AAIB) की रिपोर्ट में रनवे पर कम दृश्यता, धुंधले निशान और ढीली बजरी को हादसे का मुख्य कारण बताया गया था। इसके अलावा, इसी साल मई में भी एक प्रशिक्षण विमान बिजली के खंभे से टकराकर क्रैश हुआ था।

अब क्या कदम उठा रहा है प्रशासन? लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बाद नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और AAIB के दबाव में प्रशासन अब हरकत में आया है। बारामती हवाई अड्डे के नवीनीकरण के लिए एक नया मास्टर प्लान तैयार किया गया है।

योजना के तहत हवाई अड्डे पर स्वतंत्र एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) टावर का निर्माण, रनवे का विस्तार और नाइट लैंडिंग सिस्टम (ILS) को इंस्टॉल करने का काम प्राथमिकता पर रखा गया है। साथ ही, आपात स्थिति से निपटने के लिए एक समर्पित अग्निशमन केंद्र और सुरक्षा दीवार भी बनाई जाएगी।

बढ़ते जा रहे हैं सवाल हालांकि, प्रशासन कागजों पर बड़े बदलावों के दावे कर रहा है, लेकिन बार-बार एक ही रनवे पर हो रहे हादसे यह साबित कर रहे हैं कि सुरक्षा मानकों में अभी भी बड़ी खामियां हैं। जानकारों का कहना है कि जब तक तकनीकी खामियों को पूरी तरह दूर नहीं किया जाता, तब तक बारामती में प्रशिक्षण उड़ानों का संचालन करना खतरे से खाली नहीं है।

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