सावन का पवित्र महीना शिव भक्ति के रंग में रंगा है। चारों ओर हर-हर महादेव की गूंज है। इस बीच, उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित श्री जागेश्वर महादेव मंदिर इन दिनों श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। घने देवदार के जंगलों और जटा गंगा नदी के किनारे बसा यह मंदिर अपनी दिव्यता और अद्भुत वास्तुकला के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।
सीएम धामी ने साझा किया मंदिर का पौराणिक महत्व उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया पर इस पवित्र तीर्थस्थल का वीडियो साझा किया है। उन्होंने इसे आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रमुख केंद्र बताया। सीएम ने कहा कि स्कंद पुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों में भी इस मंदिर के गौरवशाली इतिहास का वर्णन मिलता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को सावन के इस पावन अवसर पर जागेश्वर महादेव के दर्शन कर पुण्य लाभ कमाने का आह्वान किया है।
2500 साल पुराना है इतिहास ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, यह मंदिर लगभग 2500 साल पुराना है। इस मंदिर समूह का निर्माण मुख्य रूप से कत्यूरी राजाओं द्वारा किया गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका निर्माण कार्य गुप्त काल के बाद और मध्यकाल से पहले संपन्न हुआ था।
बाल स्वरूप में विराजमान हैं महादेव जागेश्वर महादेव मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ भगवान शिव के बाल स्वरूप की पूजा की जाती है, जिन्हें बाल जागेश्वर के नाम से जाना जाता है। इस क्षेत्र का आध्यात्मिक महत्व इसी बात से समझा जा सकता है कि यहाँ सप्तऋषियों ने लंबे समय तक घोर तपस्या की थी।
आदि शंकराचार्य से जुड़ा है जुड़ाव मान्यता है कि 8वीं शताब्दी में केदारनाथ प्रस्थान करने से पहले आदि गुरु शंकराचार्य ने यहाँ आकर ध्यान लगाया था। उन्होंने ही इन प्राचीन मंदिरों के जीर्णोद्धार का कार्य करवाया था। मंदिर परिसर में सबसे पुराना मृत्युंजय मंदिर है, जो 8वीं सदी का माना जाता है।
वास्तुकला का बेजोड़ नमूना जागेश्वर मंदिर परिसर में केवल एक मंदिर नहीं है, बल्कि कई छोटे-बड़े मंदिरों का समूह है। इनमें नवदुर्गा, कालिका, प्यूष्टिदेवी और बालेश्वर मंदिर प्रमुख हैं। कत्यूरी राजाओं के विभिन्न कालखंडों में सूर्य, नवग्रह और नीलकंठेश्वर जैसे महत्वपूर्ण मंदिरों का निर्माण किया गया। यहाँ की पत्थर की नक्काशी और स्थापत्य कला आज भी इतिहास प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर देती है।
*जनपद अल्मोड़ा में देवदार के घने वनों के मध्य स्थित श्री जागेश्वर महादेव मंदिर देवाधिदेव महादेव को समर्पित अत्यंत रमणीय तीर्थ स्थल है, जो लाखों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र है। अपनी दिव्यता, आध्यात्मिक ऊर्जा और प्राचीन स्थापत्य कला के लिए विख्यात इसका उल्लेख स्कंद… pic.twitter.com/xd7vSOqX6C
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) August 6, 2026
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