98% मांगें मंजूर, फिर भी अड़े छात्र: CBI जांच की जिद पर फंसा झारखंड का परीक्षा संग्राम
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झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली को लेकर चल रहा छात्रों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। सरकार ने छात्रों की 98 प्रतिशत मांगें मान लेने का दावा किया है, लेकिन CBI जांच की मुख्य मांग पर पेंच फंस गया है। इस गतिरोध के बीच छात्रों ने 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा घेराव का ऐलान किया है।

सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच छठे दौर की वार्ता बेनतीजा रविवार को सरकार और छात्र नेताओं के बीच छठे दौर की बातचीत हुई। सरकार ने JPSC-JSSC परीक्षाओं में सुधार के लिए कई बड़े वादे किए हैं, जिनमें रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में जांच समिति और फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जरिए 90 दिनों में चार्जशीट दाखिल करना शामिल है। सरकार ने यह भी कहा कि वह वित्तीय अनियमितताओं की जांच ED से कराने की सिफारिश करेगी।

CBI जांच पर क्यों अड़ी है सरकार? तकनीकी और उच्च शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने साफ किया कि CBI जांच की मांग मानना मुमकिन नहीं है, क्योंकि JSSC-CGL परीक्षा हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में आयोजित हुई थी। सरकार का मानना है कि उसने सुधार के लिए विशेषज्ञों की समिति बनाकर छात्रों को बड़ी राहत दी है, लेकिन छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो, जो 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं, किसी भी समझौते के मूड में नहीं हैं।

JPSC के सदस्यों का इस्तीफा और घेराव की तैयारी आंदोलन के दबाव का असर JPSC पर भी दिखा है। आयोग के तीन सदस्यों ने रविवार को इस्तीफा दे दिया, जिन्हें CID ने पूछताछ के लिए तलब किया था। इससे पहले आयोग के अध्यक्ष भी इस्तीफा दे चुके हैं। दूसरी ओर, 10 अगस्त को होने वाले विधानसभा मार्च के लिए पूरे झारखंड से छात्र रांची पहुंच रहे हैं। प्रदर्शनकारी छात्र पुराने विधानसभा ग्राउंड से नए विधानसभा तक पैदल मार्च की तैयारी में हैं।

प्रशासन की सख्ती और छात्रों की हुंकार छात्रों के बड़े मूवमेंट को देखते हुए प्रशासन ने रांची की ओर आने वाले रास्तों पर वाहनों की जबरदस्त चेकिंग शुरू कर दी है। सरकार ने छात्रों से मार्च स्थगित करने की अपील की है, लेकिन छात्र नेता रवींद्र पासवान ने दोटूक कहा है कि जब तक CBI जांच की मांग पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

मुख्यमंत्री और राज्यपाल की अपील मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने युवाओं को भरोसा दिलाया है कि परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और पारदर्शिता के साथ न्याय होगा। उन्होंने बातचीत से हल निकालने की बात दोहराई है। वहीं, राज्यपाल संतोष सिंह गंगवार ने भी छात्रों से सड़क के बजाय संवाद का रास्ता चुनने का आग्रह किया है। अब सबकी निगाहें 10 अगस्त को होने वाले विधानसभा घेराव पर टिकी हैं कि क्या यह प्रदर्शन सरकार को बैकफुट पर लाएगा या कोई नया समाधान निकलेगा।

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