झारखंड विधानसभा मार्च: छात्रों की जिद और पुलिस की सख्ती, पैलेट गन के दावे पर क्या है सच?
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झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों का आंदोलन एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। सरकार के साथ कई दौर की वार्ता विफल रहने के बाद, छात्रों ने 10 अगस्त को विधानसभा घेराव का ऐलान किया है। इस घोषणा के बाद रांची में प्रशासन और पुलिस पूरी तरह हाई अलर्ट पर है।

सीबीआई जांच पर अड़े छात्र सरकार ने दावा किया है कि छात्रों की 98 फीसदी मांगें मान ली गई हैं, लेकिन प्रदर्शनकारी छात्र अपनी मुख्य मांग—सीबीआई जांच—पर अडिग हैं। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी यह मांग पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। मंत्री सुदिव्य कुमार का कहना है कि सीबीआई जांच संभव नहीं है क्योंकि यह परीक्षा अदालतों की निगरानी में हुई है, हालांकि सरकार ने ईडी जांच और त्वरित अदालतों के गठन का भरोसा दिलाया है।

पुलिस की तैयारी और पैलेट गन का विवाद विधानसभा मार्च को देखते हुए रांची में सुरक्षा बेहद सख्त कर दी गई है। सिटी एसपी पारस राणा ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा बलों की तैनाती प्रभावी ढंग से की जा रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले किसी भी छात्र को परेशान नहीं किया जाएगा, लेकिन उपद्रव करने वालों पर कानूनी कार्रवाई तय है।

सोशल मीडिया पर वायरल पैलेट गन की तस्वीरों पर एसपी ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि पुलिस के पास मौजूद उपकरण पैलेट गन नहीं, बल्कि पेंटबॉल गन है। ये गन केवल आपातकालीन स्थितियों के लिए हैं और इनका उपयोग उपद्रवियों की पहचान करने के लिए किया जाता है। एके-47 और लाठियों को भी पुलिस तैयारी का सामान्य हिस्सा बताया गया है।

राजनीति नहीं, समस्या का समाधान चाहिए: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों से अपील की है कि वे किसी के बहकावे में न आएं। उन्होंने कहा, समस्याओं का समाधान लाठी-डंडे से नहीं, बातचीत से निकलता है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा और परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, उन्होंने विपक्ष पर आंदोलन को राजनीतिक रंग देने का आरोप भी लगाया है।

आगे क्या होगा? एक ओर छात्र अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार ने आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों की एक समिति बनाने का वादा किया है ताकि परीक्षा प्रणाली में सुधार हो सके। अब नजरें 10 अगस्त पर टिकी हैं कि क्या यह मार्च शांतिपूर्ण रहेगा या प्रशासन और छात्रों के बीच कोई नया टकराव देखने को मिलेगा।

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