UPI और मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच तकरार बढ़ गई है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (अमेंडमेंट) बिल का बचाव किया था।
MDR का बोझ आखिर कौन उठाएगा? वित्त मंत्री का दावा है कि MDR केवल व्यापारियों पर लागू होता है, ग्राहकों पर नहीं। लेकिन जयराम रमेश ने इसे गुमराह करने वाला बताया है। रमेश का कहना है कि व्यापारियों पर लगने वाला यह शुल्क अंततः कीमतें बढ़ाकर या अलग से चार्ज लगाकर ग्राहकों की जेब से ही वसूला जाएगा। छोटे दुकानदार और सड़क किनारे सामान बेचने वाले, जो UPI की रीढ़ हैं, इस बोझ से सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।
कानूनी गारंटी और सरकार का भरोसा रमेश ने सवाल उठाया कि सरकार का भरोसा या ट्वीट कानूनी सुरक्षा की जगह नहीं ले सकते। नए बिल के तहत सेक्शन 10A की उस कानूनी गारंटी को हटा दिया गया है, जो UPI को ज़ीरो-MDR बनाए रखती थी। अब भविष्य में ट्रांज़ैक्शन चार्ज का फैसला सरकार के नोटिफिकेशन पर निर्भर करेगा, जो आम लोगों के लिए चिंता का विषय है।
क्या अमेरिकी दबाव में लिया गया फैसला? कांग्रेस नेता ने एक बड़ा आरोप लगाते हुए पूछा कि क्या यह बदलाव अमेरिकी दबाव में किया गया है। उन्होंने अमेरिकी ट्रेड रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के UPI और RuPay इकोसिस्टम से Visa और MasterCard का मार्केट शेयर लगातार गिर रहा है। ऐसे में कानूनी सुरक्षा को कमजोर करना विदेशी कंपनियों के लिए रास्ता खोलने जैसा है।
विदेशी कंपनियों का दबंजा रमेश ने चिंता जताई कि Google Pay और PhonePe जैसे विदेशी नियंत्रित प्लेटफॉर्म पहले से ही UPI मार्केट का 80% हिस्सा संभाले हुए हैं। ऐसे में सरकार को अपने पब्लिक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना चाहिए, न कि उसे कमजोर। उन्होंने कहा कि RBI के पास बिना ग्राहकों पर बोझ डाले इकोसिस्टम को सपोर्ट करने के बेहतर विकल्प मौजूद हैं, जिन पर सरकार गौर नहीं कर रही है।
संसदीय जवाबदेही पर सवाल जयराम रमेश ने संसद में वॉयस वोट के जरिए बिल पास कराने के तरीके पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार संसद में चर्चा से बच रही है और संवैधानिक जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ रही है। रमेश के अनुसार, इतने महत्वपूर्ण वित्तीय मुद्दे पर व्यापक चर्चा आवश्यक थी, जिसे सरकार ने नजरअंदाज कर दिया।
मेरे तथाकथित ‘भ्रामक दावों’ पर वित्त मंत्री का जवाब पांच संदिग्ध दावों पर टिका है-
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) August 7, 2026
1.मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) केवल व्यापारियों पर लागू होता है, ग्राहकों पर नहीं
यह भ्रामक है। MDR व्यापारियों से वसूला जाता है, लेकिन यह लगभग तय है कि वे ट्रांजैक्शन की इस लागत को अधिक कीमतों या… pic.twitter.com/9bXjh8QFXu
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