97 की उम्र में विमान के पंख पर खड़ी बुजुर्ग महिला: क्या हमारी मांएं ऐसा क्यों नहीं कर सकतीं?
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97 साल की ब्रिटिश महिला बैटी ब्रोमेज ने उड़ते हुए विमान के पंख पर खड़े होकर अपना ही गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ा है। यह खबर दुनिया भर के लिए प्रेरणा है, लेकिन भारतीय संदर्भ में एक तीखा सवाल भी छोड़ गई है: आखिर क्यों हमारे यहां 40 की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते महिलाओं में जोड़ों के दर्द, कमर दर्द और कमजोरी की शिकायत घर कर जाती है?

उम्र नहीं, फिटनेस तय करती है सीमाएं

विशेषज्ञों का मानना है कि एक्टिव एजिंग का रहस्य सिर्फ उम्र नहीं बल्कि आपकी जीवनशैली है। जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. ईश्वर बोहरा के अनुसार, बढ़ती उम्र में शरीर को सक्रिय रखने के लिए रोजाना शारीरिक गतिविधि, प्रोटीनयुक्त संतुलित भोजन और मानसिक सतर्कता अनिवार्य है। बैटी ब्रोमेज का यह कारनामा साबित करता है कि अगर शरीर को सही पोषण और देखभाल मिले, तो उम्र केवल एक नंबर बनकर रह जाती है।

क्यों भारतीय महिलाएं जल्दी हार मान लेती हैं?

स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नूपुर गुप्ता के अनुसार, भारतीय महिलाओं में जल्दी कमजोरी और स्वास्थ्य समस्याओं के पीछे मुख्य रूप से 5 कारण जिम्मेदार हैं:

  1. विटामिन D की भारी कमी: भारतीय महिलाओं में विटामिन D का स्तर बहुत कम पाया जाता है, जिससे हड्डियां कमजोर और शरीर हमेशा थका हुआ महसूस होता है।
  2. प्रोटीन का अभाव: हमारी वेजिटेरियन थाली में स्वाद तो है, लेकिन पर्याप्त प्रोटीन नहीं। प्रोटीन की कमी से मसल मास तेजी से घटता है, जो बुढ़ापे में कमजोरी का मुख्य कारण है।
  3. मेनोपॉज के हार्मोनल बदलाव: 40-50 की उम्र में हार्मोनल असंतुलन को सही तरीके से मैनेज न कर पाना हड्डियों और ऊर्जा स्तर को प्रभावित करता है।
  4. शारीरिक सक्रियता की कमी: एक निश्चित उम्र के बाद चलना-फिरना बंद कर देना या केवल घरेलू कामों तक सीमित हो जाना मांसपेशियों को जकड़ देता है।
  5. सेहत को प्राथमिकता न देना: सबसे बड़ी समस्या है कि महिलाएं परिवार की देखभाल में खुद को हमेशा सबसे आखिरी पायदान पर रखती हैं।

30 की उम्र के बाद बदलें ये 5 आदतें

डॉ. नूपुर गुप्ता की सलाह है कि स्वस्थ उम्र बढ़ने की तैयारी 60 में नहीं, बल्कि 30 की उम्र से शुरू होनी चाहिए:

नजरिया बदलने की जरूरत

बैटी ब्रोमेज ने 87 साल की उम्र में विंग वॉकिंग शुरू की थी। उनकी यह प्रेरणादायक कहानी हमें याद दिलाती है कि बढ़ती उम्र का मतलब सिर्फ चारदीवारी में सिमट जाना नहीं है। यदि भारतीय महिलाएं अपनी थाली के पोषण और दिनचर्या के अनुशासन पर समय रहते ध्यान दें, तो 90 की उम्र में भी सेहत का साथ बना रहना कोई चमत्कार नहीं, बल्कि एक सामान्य परिणाम हो सकता है।

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