राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को मुंबई में जेन-जी (Gen-Z) के साथ संवाद के दौरान पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसी देशों के साथ संबंधों पर अपनी राय रखी। भागवत ने स्पष्ट किया कि यद्यपि सीमा पर तनाव के समय कड़ा रुख जरूरी है, लेकिन हमेशा के लिए दुश्मनी को समाधान नहीं माना जा सकता।
टकराव के समय राष्ट्रहित सर्वोपरि भागवत ने कहा कि जब देश के सामने सैन्य युद्ध या आतंकवाद जैसी स्थिति हो, तो हर नागरिक को सरकार और सेना के निर्देशों का पालन करना चाहिए। उन्होंने थाउजेंड कट्स (हजार घाव) की नीति का जिक्र करते हुए कहा कि आतंकवाद के पीछे एक गहरी विचारधारा और सोची-समझी साजिश होती है। ऐसे में, हमें पूरी सतर्कता के साथ इस हिडन वॉर का सामना करना होगा।
इंसानियत और संवाद जरूरी संघ प्रमुख ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान और चीन से हमेशा के लिए रिश्ते नहीं तोड़े जा सकते। उन्होंने याद दिलाया कि 100 साल से भी कम समय पहले पाकिस्तान भारत का ही हिस्सा था। भागवत के अनुसार, रिश्ते तोड़े नहीं जा सकते, उन्हें टकराव के समय कुछ अवधि के लिए रोका जा सकता है। नफरत को लंबे समय तक बनाए रखना कोई भारतीय समाधान नहीं है।
भारतीय समाधान: जीतना नहीं, सामंजस्य भागवत ने भारतीय दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हुए कहा कि हमारा उद्देश्य दूसरों को खत्म करना नहीं, बल्कि सामंजस्य और समावेशी प्रक्रिया को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि अंततः बातचीत ही वह माध्यम है जिससे किसी भी समस्या का स्थायी हल निकाला जा सकता है।
जेन-जी को लेकर बदला नजरिया युवा पीढ़ी पर टिप्पणी करते हुए भागवत ने कहा कि अगर जेन-जी विरोध-प्रदर्शन कर रही है, तो उन्हें देशविरोधी करार नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने युवाओं को अपनी आने वाली पीढ़ी बताते हुए कहा कि वे मौजूद पीढ़ी की तुलना में अधिक ईमानदार हैं।
लोकतंत्र में विरोध का महत्व उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन सहमति बनाने का एक तरीका हो सकता है। यदि युवाओं की बात कहीं नहीं सुनी जाती, तो वे आंदोलन का रास्ता चुनते हैं। भागवत के अनुसार, आंदोलन का उद्देश्य समाज में विभाजन पैदा करना नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार लाना होना चाहिए। उन्होंने युवाओं के साथ संवाद को समाधान की पहली प्राथमिकता बताया।
Mumbai, Maharashtra: When asked should civil societies maintain ties with students or regular civil society in Pakistan and China, invite them, and have conversations, RSS Chief Mohan Bhagwat says, Not during times of conflict, I told you. Conflict is a military war or even… pic.twitter.com/ddGX9GXDpI
— IANS (@ians_india) August 6, 2026
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