असम में जल प्रलय: 14 जिलों में हाहाकार, 95 लोगों की मौत और तबाही का मंजर
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असम में मानसून की मार ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। लगातार बारिश और उफनती नदियों के कारण राज्य के 14 जिलों में स्थिति भयावह हो गई है। अब तक डेढ़ लाख से अधिक लोग इस आपदा की चपेट में आ चुके हैं।

मौत का आंकड़ा 95 के पार असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) की बुधवार को आई ताजा रिपोर्ट के अनुसार, बीते 24 घंटों में 6 और लोगों की मौत दर्ज की गई है। इसके साथ ही राज्य में बाढ़ और बारिश से मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 95 हो गई है।

शिवसागर में सबसे ज्यादा तबाही बाढ़ का सबसे घातक रूप शिवसागर जिले में देखने को मिला है, जहां 60 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हैं। वहीं, चराईदेव में 31 हजार और जोरहाट में 20 हजार से ज्यादा लोग बेघर होने की कगार पर हैं। इसके अलावा, बाढ़ के पानी में 55 हजार से अधिक मवेशियों के बहने की सूचना है, जिससे किसानों की कमर टूट गई है।

365 गांव जलमग्न, फसलों का भारी नुकसान प्राकृतिक आपदा ने जमीनी हकीकत को बदल दिया है। राज्य के 365 गांव पूरी तरह पानी में डूबे हुए हैं। एएसडीएमए के आंकड़ों के मुताबिक, बाढ़ के कारण 15,342.92 हेक्टेयर कृषि भूमि बर्बाद हो गई है, जिससे आने वाले समय में आर्थिक संकट गहराने के आसार हैं।

राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर लोग प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए 4 जिलों में 55 राहत शिविर और वितरण केंद्र खोले हैं। वर्तमान में 17,857 लोग इन शिविरों में शरण लिए हुए हैं। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने ट्वीट कर भरोसा दिलाया है कि 9 अगस्त से नुकसान का जमीनी आकलन शुरू होगा और प्रभावितों को उचित मुआवजा दिया जाएगा।

केंद्र सरकार का दौरा और सहायता का आश्वासन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया। नड्डा ने कहा कि तबाही का दायरा बहुत बड़ा है और हालात को सामान्य होने में वक्त लगेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार इस कठिन घड़ी में असम के साथ खड़ी है और राहत कार्य में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।

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