क्या टीम इंडिया का ड्रेसिंग रूम अशांत है? लंका दौरे से पहले गंभीर के सामने सबसे बड़ी चुनौती
News Image

श्रीलंका का आगामी दौरा टीम इंडिया के लिए महज़ एक द्विपक्षीय सीरीज़ नहीं है, बल्कि वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के फाइनल की रेस में बने रहने की एक कठिन अग्निपरीक्षा है। स्पिन की मददगार पिचों पर लंकाई शेरों को मात देना और उसके बाद न्यूजीलैंड व ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीमों का सामना करना, भारतीय टीम के लिए किसी बड़े चक्रव्यूह से कम नहीं है। लेकिन इन चुनौतियों के बीच टीम इंडिया के भीतर से उठ रही अविश्वास की खबरें कोच गौतम गंभीर के लिए नई मुसीबत बन गई हैं।

व्हाइट बॉल में चमक, रेड बॉल में खामोशी गौतम गंभीर के पिछले दो साल के कार्यकाल पर नज़र डालें तो सीमित ओवरों (व्हाइट बॉल) में टीम ने शानदार प्रदर्शन किया है। 2025 की चैंपियंस ट्रॉफी और 2026 के T20 वर्ल्ड कप में मिली जीत ने गंभीर की आक्रामक रणनीति और रिस्क लेने की क्षमता पर मुहर लगाई है। हालांकि, रेड बॉल क्रिकेट और विदेशी दौरों की तस्वीर बिल्कुल उलट है। WTC के मौजूदा चक्र में टीम का पांचवें नंबर पर खिसकना, साउथ अफ्रीका के हाथों घरेलू हार और इंग्लैंड में खराब प्रदर्शन ने रणनीतिक खामियों को उजागर कर दिया है।

ड्रेसिंग रूम में सुलगती आग का सच? हालिया मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि टीम इंडिया के ड्रेसिंग रूम का माहौल दमघोंटू हो गया है। कई सीनियर खिलाड़ी गंभीर की कोचिंग शैली को लेकर सहज नहीं हैं और उन्होंने अपनी चिंताएं बीसीसीआई के सामने रखी हैं। सवाल यह है कि क्या मैदान पर दिखने वाली हार के पीछे यही आपसी मनमुटाव और ब्लेम गेम की राजनीति जिम्मेदार है? जब खिलाड़ी सुरक्षा और भरोसे की कमी महसूस करते हैं, तो उसका असर सीधे उनके प्रदर्शन पर पड़ता है।

हार का ठीकरा और कम्यूनिकेशन गैप एक बड़ा विवाद यह भी है कि हार की जिम्मेदारी कौन ले रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोचिंग स्टाफ अक्सर हार के लिए खिलाड़ियों के एग्जीक्यूशन या फिटनेस को जिम्मेदार ठहराता है। नेतृत्व की परिभाषा यह कहती है कि जीत का श्रेय खिलाड़ियों को मिलना चाहिए और हार की जिम्मेदारी कोच को लेनी चाहिए। यदि यह संतुलन बिगड़ता है, तो खिलाड़ियों और प्रबंधन के बीच अविश्वास की खाई चौड़ी होती जाती है।

असुरक्षा का माहौल: सूर्यकुमार यादव से शमी तक टीम प्रबंधन के कुछ फैसलों ने ड्रेसिंग रूम की एकता पर सवाल खड़े किए हैं। T20 वर्ल्ड कप जिताने वाले कप्तान सूर्यकुमार यादव से कप्तानी छीनना और उन्हें टीम से बाहर करना, खिलाड़ियों के बीच असुरक्षा की भावना पैदा करता है। वहीं, मोहम्मद शमी और भुवनेश्वर कुमार जैसे मैच-विनर्स को नज़रअंदाज़ करना और निरंतर फ्लॉप हो रहे खिलाड़ियों को मौके देना, सिलेक्शन पॉलिसी पर गंभीर सवाल उठाता है।

गंभीर के लिए अभी नहीं तो कभी नहीं का वक्त गौतम गंभीर खुद एक फाइटर रहे हैं और वे जानते हैं कि जीत के लिए ड्रेसिंग रूम का एक मुट्ठी होना अनिवार्य है। श्रीलंका दौरा एक नई और सकारात्मक शुरुआत का सबसे बेहतरीन अवसर है। गंभीर को अपनी आक्रामक सोच को टीम के भरोसे के साथ जोड़ना होगा। यदि बीसीसीआई और गंभीर समय रहते पारदर्शी संवाद की प्रक्रिया शुरू नहीं करते, तो टीम इंडिया के लिए भविष्य की राह और भी मुश्किल हो सकती है। अब समय आ गया है कि निजी अहंकार को ड्रेसिंग रूम के बाहर रखकर सिर्फ टीम इंडिया के लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित किया जाए।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

रोहित खुद नहीं लेंगे संन्यास, अब यह फैसला टीम मैनेजमेंट को करना होगा

Story 1

दो साल का वनवास खत्म: शेख हसीना ने तोड़ी चुप्पी, दिसंबर में वतन वापसी का किया ऐलान

Story 1

फरीदाबाद का दहलाने वाला CCTV: स्कूल में शिक्षिका की बर्बर हत्या, 32 सेकंड में लिए कई बार

Story 1

क्या राजस्थान रॉयल्स का हिस्सा बनेंगे हार्दिक पांड्या? सोशल मीडिया पोस्ट से मचा हड़कंप

Story 1

मेटा की मुश्किलें बढ़ीं: जुकरबर्ग ने मांगी माफी, अब प्लेटफॉर्म पर लटकी कानूनी सुरक्षा छिनने की तलवार

Story 1

RBI का बड़ा फैसला: महंगाई से जंग जारी, EMI में नहीं मिलेगी राहत

Story 1

सोनम वांगचुक की अपील पर देवेंद्र महतो का बड़ा फैसला: आमरण अनशन खत्म, लेकिन सरकार के खिलाफ जंग जारी

Story 1

श्रीलंका पहुंची टीम इंडिया, पर बारिश ने बढ़ाई चिंता: बुमराह समेत कई स्टार खिलाड़ी बाहर

Story 1

JPSC-JSSC प्रदर्शन: छात्रों को मनाने मैदान में उतरी सरकार, CM बोले- सिर्फ जांच नहीं, कंक्रीट सॉल्यूशन चाहिए

Story 1

# मौत के जबड़े से खेल: गहरे पानी में जांबाज युवक ने किया विशाल अजगर का रेस्क्यू, रोंगटे खड़े कर देगा ये वीडियो