मेटा (फेसबुक की पैरेंट कंपनी) के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने बच्चों के शोषण से जुड़ी सामग्री (CSAM), डीपफेक और प्लेटफॉर्म संचालन में हुई गंभीर गलतियों के लिए माफी मांगी है। यह माफी तब आई है जब मेटा की ग्लोबल टीम ने केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात की।
आईटी मंत्रालय ने मेटा को स्पष्ट कर दिया है कि वे अब इंटरमीडियरी (मध्यस्थ) की परिभाषा के दायरे में नहीं आते हैं। सरकार ने कहा कि चूँकि मेटा के एल्गोरिदम खुद यह तय करते हैं कि कौन सी सामग्री किस यूजर को दिखाई जाएगी, इसलिए वे कंटेंट के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं।
इस बयान के साथ ही मेटा को मिलने वाली सेफ हार्बर (कानूनी सुरक्षा) सुविधा के खत्म होने का खतरा मंडरा रहा है। अगर यह सुरक्षा वापस ली जाती है, तो मेटा के प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक सामग्री मिलने पर कंपनी के खिलाफ सीधे प्राथमिकी (FIR) दर्ज हो सकेगी और कानूनी अभियोजन की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।
विवाद की एक बड़ी वजह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फेसबुक से हटाया गया वीडियो भी है। छात्रों और जेनरेशन जेड को संबोधित करने वाला पीएम का वीडियो करीब 5-6 घंटे के लिए फेसबुक से गायब हो गया था। इसे लेकर संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने गहरी आपत्ति जताई है।
संसदीय समिति ने मार्क जुकरबर्ग को इस मामले में बिना शर्त माफी मांगने के लिए 3 दिन का समय दिया है। चेतावनी दी गई है कि यदि समय सीमा के भीतर संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिलती है, तो भारत में मेटा को प्राप्त सभी कानूनी छूटों को खत्म कर दिया जाएगा।
मेटा ने खुद माना है कि उसके प्लेटफॉर्म पर बड़ी मात्रा में गैर-कानूनी कंटेंट प्रमोट किया गया था। जांच में यह भी सामने आया है कि खास ऑडियंस को टारगेट करने के लिए पेड प्रमोशन का सहारा लिया गया, जिसमें बाल यौन दुर्व्यवहार सामग्री (CSAM) जैसे गंभीर मुद्दे भी शामिल रहे। सरकार ने इसे लेकर पहले ही कंपनी को नोटिस जारी कर रखा है।
Mark Zuckerberg sent his apologies for the CSAM (Child Sexual Abuse Material) content, deepfake content and errors in operating the platform.
— ANI (@ANI) August 5, 2026
It was made clear to them that they are not covered under Intermediary definition. They select who receives the content. Safe harbour… https://t.co/kfIcMNdclk pic.twitter.com/CrwfQrsN1V
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