गलतियां बताएं तो राम-विरोधी , भ्रष्टाचार पर सवाल करें तो देश-विरोधी : संसद के बाहर कांग्रेस का जोरदार प्रदर्शन
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संसद के मानसून सत्र के दौरान दिल्ली में सियासी पारा चढ़ गया है। विपक्षी दलों ने सरकार की कथित मनमानी और जवाबदेही की मांग को लेकर संसद के बाहर मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और प्रियंका गांधी समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने गांधी प्रतिमा से मकर द्वार तक मार्च निकाला।

चर्चा से सरकार क्यों भाग रही है?

राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर सदन का अपमान करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, हम चर्चा के लिए तैयार हैं, लेकिन प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सदन में आने से बच रहे हैं। अगर सदन में चर्चा नहीं होगी, तो क्या वे घर बैठकर बयान जारी करेंगे? यह लोकतंत्र का अपमान है।

राम मंदिर चंदे का हिसाब क्यों नहीं?

अयोध्या राम मंदिर निर्माण के दौरान एकत्र किए गए चंदे और ट्रस्ट की जमीन पर हुए कथित भ्रष्टाचार को लेकर खरगे ने तल्ख तेवर अपनाए। उन्होंने कहा कि विपक्ष को राम-विरोधी कहना गलत है। हम केवल यह पूछ रहे हैं कि राम के नाम पर आए सोने, चांदी और करोड़ों रुपये के चंदे का हिसाब कहां है? 70 एकड़ जमीन से जुड़ी गड़बड़ियों का जवाब क्यों नहीं दिया जा रहा?

राष्ट्रवाद के मुद्दे पर सरकार को घेरा

खरगे ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर हम सरकार की गलतियों को उजागर करते हैं, तो हमें राम-विरोधी कहा जाता है। यदि भ्रष्टाचार पर सवाल उठाएं, तो देश-विरोधी करार दिया जाता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आजादी की लड़ाई में जिनका योगदान नहीं रहा, वे आज हमें राष्ट्रवाद का पाठ पढ़ा रहे हैं।

तानाशाही नहीं, लोकतंत्र चाहिए: प्रियंका गांधी

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रदर्शन के दौरान सरकार को कड़े शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि भारत एक लोकतंत्र है, किसी का शाही दरबार नहीं। उन्होंने 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए कहा, अगर आम जनता, खासकर बच्चों पर गोलियां चलाई गई हैं या आंसू गैस छोड़ी गई है, तो इसके आदेश देने वालों को जवाबदेही तय करनी होगी।

किन मुद्दों पर है बवाल?

कांग्रेस का यह प्रदर्शन मुख्य रूप से तीन बड़े मुद्दों को लेकर है:

  1. 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कथित पुलिस कार्रवाई।
  2. अयोध्या राम मंदिर चंदे में कथित हेराफेरी।
  3. संसद के भीतर सरकार की चुप्पी और चर्चा से भागने की प्रवृत्ति।

विपक्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सरकार इन मामलों पर संसद में स्पष्टीकरण नहीं देती, उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

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