दिल्ली मेट्रो में अब दान करें पुराने कपड़े: सरकार की अर्पण पहल से पर्यावरण और रोजगार दोनों को मिलेगा बढ़ावा
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दिल्ली सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और कचरा कम करने की दिशा में एक अनोखी पहल शुरू की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अर्पण नाम से एक नई योजना लॉन्च की है, जिसके तहत दिल्ली मेट्रो के स्टेशनों पर पुराने कपड़े जुटाए जाएंगे। यह स्कीम न केवल प्रदूषण घटाने में मदद करेगी, बल्कि महिलाओं के लिए आजीविका के नए रास्ते भी खोलेगी।

5 प्रमुख मेट्रो स्टेशनों पर शुरू हुई सुविधा इस योजना के पहले चरण में दिल्ली के पांच प्रमुख मेट्रो स्टेशनों पर अर्पण केंद्र स्थापित किए गए हैं। इनमें पंजाबी बाग पश्चिम, शालीमार बाग, मयूर विहार फेज-1, शाहदरा और रोहिणी पश्चिम शामिल हैं। यह पहल दिल्ली सरकार, DMRC और दिल्ली मेट्रो लेडीज वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन के संयुक्त प्रयास से शुरू की गई है। आने वाले समय में इसे 10 स्टेशनों तक विस्तारित किया जाएगा।

क्या है अर्पण योजना और इसका उद्देश्य? फास्ट फैशन के दौर में कपड़ों की खपत और बर्बादी के आंकड़े चिंताजनक हैं। एक जींस बनाने में करीब 3781 लीटर पानी खर्च होता है। साथ ही, फैशन इंडस्ट्री वैश्विक कार्बन उत्सर्जन का 2 से 8 प्रतिशत हिस्सा पैदा करती है। सरकार का उद्देश्य इन पुराने कपड़ों को लैंडफिल में जाने से बचाना और उन्हें रीसाइकिल करके बैग, नए कपड़े, सजावटी सामान और धागे जैसे उपयोगी उत्पाद तैयार करना है।

कैसे करें कपड़े दान? कपड़ा दान करने की प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी बनाया गया है। प्रत्येक अर्पण केंद्र पर क्यूआर (QR) कोड लगाए गए हैं। कोई भी नागरिक कोड स्कैन करके आसानी से कपड़े दान कर सकता है। दान की प्रक्रिया पूरी होते ही आपको एक डिजिटल रसीद भी प्रदान की जाएगी, ताकि दान का रिकॉर्ड बना रहे।

पर्यावरण के साथ महिलाओं को भी मिलेगा संबल इस योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू महिला सशक्तिकरण है। कपड़ों की छंटाई, प्रोसेसिंग और उनसे नए उत्पादों का निर्माण करने के कार्यों में महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे न केवल पर्यावरण बचेगा, बल्कि बड़ी संख्या में महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर और सम्मानजनक आजीविका भी प्राप्त होगी।

सरकार की अपील: जिम्मेदारी निभाएं मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का मानना है कि हर नागरिक का छोटा सा योगदान पर्यावरण के लिए बड़ा बदलाव ला सकता है। पुराने कपड़ों का सही इस्तेमाल न केवल जल और ऊर्जा जैसे प्राकृतिक संसाधनों को बचाएगा, बल्कि जरूरतमंदों के जीवन में भी सकारात्मक प्रभाव डालेगा। यह पहल दिल्ली को कचरा मुक्त और हरित शहर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

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