बिहार-MP में मायूसी, पर गुजरात में दिवाली: मांजलपुर का किला फतह कर सतीश पटेल ने दिखाया दम
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बिहार के बांकीपुर और मध्य प्रदेश के दतिया उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को करारा झटका लगा है। इन दो राज्यों में मिली हार के बीच गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीट पर बीजेपी ने अपनी साख बचाते हुए शानदार जीत दर्ज की है। इस जीत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि मांजलपुर आज भी पार्टी का अभेद्य किला बना हुआ है।

30 हजार से ज्यादा वोटों की बड़ी जीत बीजेपी उम्मीदवार सतेंद्रभाई गोविंदभाई पटेल, जिन्हें सतीश पटेल के नाम से जाना जाता है, ने कांग्रेस के कद्दावर नेता भीखा रबारी को 30,630 वोटों के भारी अंतर से शिकस्त दी। 20 राउंड की मतगणना में सतीश पटेल शुरुआत से ही बढ़त बनाए हुए थे। अंत में, सतीश पटेल को 55,481 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के भीखा रबारी 24,851 वोटों पर ही सिमट गए। इस उपचुनाव में करीब 37.5 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था।

कौन हैं 62 वर्षीय सतीश पटेल? सतीश पटेल वडोदरा की राजनीति में कोई नया नाम नहीं हैं। करीब 32 साल से बीजेपी के साथ जुड़े पटेल सहकारिता क्षेत्र के दिग्गज नेता माने जाते हैं। वह वडोदरा नगर निगम (VMC) की स्थायी समिति के अध्यक्ष और पार्टी के वडोदरा जिला अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। छानी क्षेत्र निवासी होने के बावजूद, उन पर पार्टी द्वारा जताया गया भरोसा उनकी जीत के साथ पूरी तरह सही साबित हुआ है।

योगेश काका की विरासत को आगे बढ़ाने का वादा जीत के बाद जनता का आभार जताते हुए सतीश पटेल ने कहा, मांजलपुर की जनता ने मुझे वही प्यार दिया है, जो वे हमेशा स्वर्गीय योगेश काका को देते आए थे। यह जीत जनता की है। मेरी प्राथमिकता क्षेत्र में बेहतर सड़कें, पानी और बुनियादी विकास कार्यों को गति देना होगी। गौरतलब है कि मांजलपुर सीट पर स्वर्गीय योगेश पटेल का दबदबा रहा था, जिन्होंने अपने करियर में लगातार 8 विधानसभा चुनाव जीते थे।

कांग्रेस ने हार के बाद उठाए सवाल दूसरी तरफ, करारी हार झेलने वाले गुजरात कांग्रेस के उपाध्यक्ष भीखा रबारी ने चुनाव प्रक्रिया पर ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने मतदान के अंतिम समय में डर और खौफ का माहौल बना दिया था, जिसके चलते उनके समर्थक वोट देने नहीं निकल पाए। रबारी ने इसे आचार संहिता का उल्लंघन बताते हुए चुनाव को निष्पक्ष मानने से इनकार कर दिया।

बीजेपी का अभेद्य किला: मांजलपुर 2008 में परिसीमन के बाद वजूद में आई मांजलपुर सीट बीजेपी की सबसे सुरक्षित सीटों में से एक रही है। स्वर्गीय योगेश पटेल के निधन के बाद यह सीट खाली हुई थी, जिसे बचाना बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा का सवाल था। सतीश पटेल की इस जीत ने स्पष्ट कर दिया है कि वडोदरा की इस सीट पर फिलहाल कमल का पलड़ा भारी है।

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