बांकीपुर में भाजपा का 31 साल पुराना किला ढहा: आदित्य ठाकरे बोले- अब पूरे देश में बदलेगी हवा
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पटना/मुंबई: बिहार की बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने देश की राजनीति को हिलाकर रख दिया है। जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर ने भाजपा के गढ़ को भेदते हुए ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। इस जीत के बाद शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है।

भाजपा के लिए बड़ा राजनीतिक झटका आदित्य ठाकरे ने बांकीपुर की हार को भाजपा के लिए एक बड़ा वेक-अप कॉल करार दिया है। उन्होंने कहा, यह सिर्फ एक सीट की हार नहीं है, बल्कि उस बदलाव की शुरुआत है जो पूरे देश में चलेगी। जिन जगहों पर भाजपा पिछले 25 वर्षों से अजेय बनी हुई थी, वहां अब हार का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने भाजपा नेताओं के इस अहंकार पर तंज कसा कि वहां किसी भी उम्मीदवार को खड़ा कर चुनाव जीता जा सकता है। ठाकरे के अनुसार, जनता अब बदलाव का मन बना चुकी है।

राम मंदिर और भ्रष्टाचार पर घेरा ठाकरे ने राम मंदिर में कथित चढ़ावा गबन के मुद्दे को लेकर भाजपा को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, जो लोग भ्रष्टाचार पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें हिंदू विरोधी करार देना भाजपा की पुरानी रणनीति है। क्या अधूरे राम मंदिर का उद्घाटन करना, शंकराचार्यों और राष्ट्रपति को दरकिनार रखना हिंदू विरोधी नहीं है? उन्होंने दावा किया कि पप्पू यादव इस भ्रष्टाचार को उजागर कर रहे थे, इसलिए उन्हें चुप कराने की साजिश रची जा रही है।

पालघर कांड की याद दिलाई आदित्य ठाकरे ने पालघर साधु हत्याकांड का जिक्र करते हुए भाजपा को आईना दिखाया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस मामले के मुख्य आरोपी सीधे तौर पर भाजपा से जुड़े थे। उन्होंने कहा कि आज देश में हिंदुओं की जो स्थिति है, उसके लिए भाजपा की तुष्टिकरण की नीतियां ही जिम्मेदार हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकारी भ्रष्टाचार पर सवाल उठाना राष्ट्रविरोधी कैसे हो सकता है?

प्रशांत किशोर ने रचा इतिहास बांकीपुर सीट पर 31 साल से काबिज भाजपा का वर्चस्व प्रशांत किशोर ने खत्म कर दिया है। उन्होंने भाजपा के नीरज कुमार सिन्हा को 19,419 वोटों के बड़े अंतर से मात दी। प्रशांत किशोर को कुल 63,203 वोट (करीब 49%) मिले। यह जीत इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि महज 34.30 प्रतिशत मतदान के बावजूद उन्होंने भाजपा के पारंपरिक वोट बैंक में बड़ी सेंध लगाई।

भाजपा का अभेद्य किला ध्वस्त इस सीट (पूर्व में पटना पश्चिम) पर 1995 से भाजपा का कब्जा था। दिग्गज नेता नितिन नवीन यहां लगातार पांच बार विधायक रहे थे। उनके राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई इस सीट पर भाजपा की हार ने साबित कर दिया है कि स्थानीय नाराजगी और जमीनी मुद्दों के आगे बड़े दावे और पुराने समीकरण अब फेल हो रहे हैं।

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