प्रेस कॉन्फ्रेंस में जूता कांड : पप्पू यादव पर जानलेवा हमले की कोशिश, आरोपी के पास से चाकू बरामद
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दिल्ली: पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव के दिल्ली स्थित सरकारी आवास पर सोमवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन पर जूता फेंका गया। घटना उस समय हुई जब सांसद राम मंदिर चंदा गबन से जुड़े विवादों और खुद को मिल रही धमकियों पर बात कर रहे थे।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में अचानक हुआ हमला

पप्पू यादव मीडिया से मुखातिब थे, तभी अचानक एक युवक वहां पहुंचा और चिल्लाते हुए हंगामा करने लगा। युवक ने सांसद पर निशाना साधते हुए जूता फेंका। स्थिति को भांपते हुए पप्पू यादव ने खुद फुर्ती दिखाई और हमलावर को दबोच लिया। मौके पर मौजूद उनके सहयोगियों ने तुरंत आरोपी को काबू में किया और पुलिस को सूचना दी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

पहले से मिल रही थी जान से मारने की धमकियां

हंगामे से कुछ मिनट पहले ही पप्पू यादव अपने उन विरोध प्रदर्शनों का जिक्र कर रहे थे, जिसमें उन्होंने राम मंदिर चढ़ावे में कथित गबन का मुद्दा उठाया था। सांसद ने दावा किया कि उस प्रदर्शन के बाद से ही उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें जिंदा जलाने की चेतावनी दी गई है और उनके सिर को काटकर लाने वाले को 51 लाख रुपये का इनाम देने का ऐलान किया गया है।

संतों की नाराजगी बनी हमले की वजह

आरोपी की पहचान बुलंदशहर निवासी सुमित के रूप में हुई है। प्रारंभिक पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह पप्पू यादव द्वारा राम मंदिर के मुद्दे पर किए गए प्रदर्शन और संतों के कथित अपमान से आक्रोशित था। पुलिस को आरोपी के पास से एक चाकू भी बरामद हुआ है, जिसकी गहन जांच की जा रही है कि क्या उसका इरादा सांसद पर जानलेवा हमला करने का था।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

इस घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी नेताओं की सुरक्षा के प्रति पुलिस की उदासीनता चिंताजनक है। पप्पू यादव ने भी पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार के कार्यकाल में कानून-व्यवस्था के गिरते स्तर पर तीखा हमला बोला है।

फिलहाल, पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस हमले के पीछे कोई बड़ा षड्यंत्र है या यह केवल एक व्यक्ति का निजी आक्रोश था।

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