एक्सीडेंट में गंवाया पैर, फिर भी नहीं मानी हार: शुभम जुयाल ने कॉमनवेल्थ में रचा इतिहास
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सेना में अफसर बनने का था सपना उत्तराखंड के रुड़की के रहने वाले शुभम जुयाल का बचपन से ही एक ही सपना था—सेना की वर्दी पहनकर देश की सेवा करना। उनके पिता भी सेना में नायब सूबेदार रहे थे, इसलिए शुभम के लिए यह सिर्फ करियर नहीं, बल्कि एक विरासत थी। 2022 में उन्होंने आर्मी की सर्विस एंट्री स्कीम के तहत एसीसी (ACC) की लिखित परीक्षा पास कर ली थी।

इंटरव्यू वाले दिन पलटी किस्मत सब कुछ योजना के अनुसार चल रहा था, तभी एसएसबी (SSB) इंटरव्यू के लिए जाते समय शुभम एक भीषण सड़क हादसे का शिकार हो गए। महज 26 साल की उम्र में हुए इस हादसे ने न केवल उनके शरीर को गंभीर रूप से घायल किया, बल्कि उनके अफसर बनने के सपने को भी चकनाचूर कर दिया। चोट इतनी गहरी थी कि डॉक्टरों को उनका एक पैर काटना पड़ा।

अस्पताल के बेड से पोडियम तक का सफर अस्पताल के बेड पर जिंदगी और मौत के बीच झूलते हुए शुभम ने हार नहीं मानी। उन्होंने भविष्य की चिंता छोड़कर आज में जीने का फैसला किया। 2023 में पुणे के आर्टिफिशियल लिम्ब सेंटर में उन्हें दो रास्ते मिले—डिप्लोमा कोर्स या पैरा-स्पोर्ट्स। शुभम ने चुनौतीपूर्ण रास्ता चुना और पैरा-स्पोर्ट्स को अपना लिया। यहां उन्हें सूबेदार सोमन राणा जैसे अनुभवी खिलाड़ियों का साथ मिला, जिन्होंने उन्हें ट्रेनिंग में बखूबी गाइड किया।

ग्लासगो में भारत का मान बढ़ाया ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स के पैरा-एथलेटिक्स (पुरुष शॉट पुट, एफ57 इवेंट) में शुभम ने सिल्वर मेडल जीतकर अपनी मेहनत को सार्थक कर दिया। इस इवेंट में भारत के सोमन राणा ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया। यह भारत के लिए ऐतिहासिक लम्हा था क्योंकि पहली बार इस इवेंट में देश को डबल पोडियम फिनिश मिली।

दमदार प्रदर्शन से जीता सिल्वर शुभम ने अपने खेल में जबरदस्त निरंतरता दिखाई। उन्होंने अपने छठे और आखिरी प्रयास में 13.28 मीटर का अपना सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया, जिसने उन्हें सिल्वर मेडल दिलाया। शुरुआती थ्रो में 13.08 मीटर के साथ शुरुआत करने वाले शुभम ने हर राउंड में सुधार किया और अंत में देश के लिए गौरवमयी पदक हासिल किया।

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