संसद परिसर में कालनेमि का नाटक: पप्पू यादव का साधु वेश और सनातन पर प्रहार
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संसद भवन परिसर में शुक्रवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने न केवल राजनीतिक मर्यादाओं को लांघा, बल्कि सनातन धर्म की भावनाओं को भी गहरी चोट पहुंचाई है। सांसद पप्पू यादव ने भगवा वस्त्र धारण कर, साधु का वेश धरकर चंदा चोरी के विरोध का स्वांग रचा। इस प्रदर्शन में उनके आसपास विपक्षी दलों के कई बड़े नेता मौजूद थे, जो इस पूरे तमाशे के प्रत्यक्ष गवाह बने।

साधु वेश में सियासी पाखंड पप्पू यादव ने जमीन पर बैठकर टीन के डिब्बों को दान-पात्र के रूप में इस्तेमाल किया और हाथ में भगवान राम की तस्वीर लेकर लोगों से चंदा मांगते दिखे। हैरानी की बात यह है कि जब लोग उन्हें दान दे रहे थे, तो वे उसे पात्र में डालने के बजाय जेब में रख रहे थे। यह प्रदर्शन अयोध्या में राम मंदिर से जुड़ी कथित चंदा चोरी के विरोध में था, लेकिन इसका तरीका पूरी तरह से सनातन धर्म और साधु-संतों को अपमानित करने वाला था।

टिन्नू यादव क्यों नहीं बने पप्पू यादव? सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि पप्पू यादव का उद्देश्य चंदा चोरी का विरोध करना था, तो उन्होंने साधु का वेश क्यों धरा? अयोध्या में दान चोरी के मामले में जिन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, वे मंदिर प्रबंधन के कर्मचारी थे, न कि साधु-संत। इस चोरी का मास्टरमाइंड टिन्नू यादव था, जो मंदिर का कर्मचारी था। यदि पप्पू यादव को सच में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठानी थी, तो वे एक भ्रष्ट कर्मचारी का प्रतीकात्मक रूप धर सकते थे। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया, क्योंकि उनका असली एजेंडा भ्रष्टाचारियों का विरोध करना नहीं, बल्कि भगवा पहनकर सनातन को कलंकित करना था।

वोट बैंक की राजनीति या सनातन का अपमान? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पप्पू यादव ने यह कालनेमि वाला नाटक केवल अपने वोट बैंक को साधने के लिए किया। अगर वे वाकई ईमानदार होते, तो क्या वे दरगाहों या अन्य धार्मिक स्थानों पर होने वाली चंदा चोरी पर भी इसी तरह मौलाना बनकर सड़कों पर उतरते? इसका जवाब नहीं है। बहराइच की दरगाह में हुई 100 करोड़ की कथित चंदा चोरी पर चुप्पी साधे रखने वाले पप्पू यादव ने साधु वेश धारण कर जानबूझकर हिंदू आस्था को निशाना बनाया है।

लोकतंत्र के मंदिर की गरिमा को ठेस पप्पू यादव का यह कृत्य केवल धार्मिक अपमान नहीं, बल्कि संसद की गरिमा पर भी चोट है। संसद परिसर का उपयोग अपनी राजनीतिक नौटंकी के लिए करना और भगवा पहनकर चंदा चोरी का स्वांग रचना भारत की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचाता है। यह वीडियो अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन ताकतों के लिए मसाला बन गया है जो भारत और सनातन धर्म को नीचा दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ते।

इतिहास और आस्था का उपहास जिस पप्पू यादव को अपनी आपराधिक पृष्ठभूमि के कारण जेल की सजा काटनी पड़ी थी, वे आज खुद को तपस्वी के रूप में पेश कर रहे हैं। भगवान राम की तस्वीर हाथ में लेकर किसी के पैरों में पड़ना या साधु वेश में भ्रष्टाचार का नाटक करना, यह आस्था का घोर अपमान है। यह विडंबना ही है कि बिहार, जिसने राम मंदिर आंदोलन में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले साधु-संत दिए, उसी बिहार के एक सांसद ने आज उन्हीं संतों पर चोरी का कलंक लगाने का कुत्सित प्रयास किया है।

अंत में, यह समझना आवश्यक है कि कुछ मुट्ठी भर भ्रष्ट कर्मचारियों के पाप से समूचे सनातन समाज और साधु-संतों को चोर नहीं ठहराया जा सकता। पप्पू यादव का यह राजनीतिक नाटक भले ही उन्हें कुछ घंटों की चर्चा में ले आया हो, लेकिन इसने सनातनी आस्था के करोड़ों लोगों के मन में एक गहरा घाव और आक्रोश पैदा कर दिया है।

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