कावेरी जल विवाद: 13 अगस्त को कर्नाटक बंद का ऐलान, CM शिवकुमार ने तमिलनाडु के समकक्ष से मुलाकात टालने की अपील की
News Image

कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी नदी के पानी का पुराना विवाद एक बार फिर उग्र हो गया है। कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के आदेश के बाद कर्नाटक में विरोध की लहर दौड़ गई है। कन्नड़ समर्थक संगठनों ने 13 अगस्त को राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया है।

क्या है कावेरी जल विवाद? कावेरी नदी का जल बंटवारा देश के सबसे पुराने विवादों में से एक है, जो करीब 130 वर्षों से चला आ रहा है। यह मुख्य रूप से कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच पानी की हिस्सेदारी को लेकर है। 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अंतिम फैसला सुनाया था, जिसके तहत कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए तय मात्रा में पानी छोड़ना अनिवार्य है। हालांकि, मानसून में कमी और पानी की मांग बढ़ने पर दोनों राज्यों के बीच अक्सर टकराव की स्थिति पैदा हो जाती है।

ताजा विवाद की वजह हाल ही में CWMA ने कर्नाटक को 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी तमिलनाडु छोड़ने का निर्देश दिया है। राज्य के कन्नड़ समर्थक संगठनों ने इसे मानने से इनकार कर दिया है। संगठन का तर्क है कि कर्नाटक खुद पानी की कमी से जूझ रहा है और पानी छोड़ने से राज्य के किसानों की फसलें बर्बाद हो जाएंगी।

13 अगस्त को कर्नाटक बंद की तैयारी एक्टिविस्ट वताल नागराज ने घोषणा की है कि 13 अगस्त को सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक कर्नाटक बंद रहेगा। इस बंद को फिल्म चैंबर ऑफ कॉमर्स समेत 1,600 से अधिक संगठनों का समर्थन प्राप्त है। वताल नागराज ने चेतावनी दी है कि यदि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय कावेरी जल की मांग लेकर बेंगलुरु आते हैं, तो उनका विरोध किया जाएगा और हवाई अड्डे को भी ब्लॉक किया जा सकता है।

CM शिवकुमार की अपील और सर्वदलीय बैठक स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने रविवार (2 अगस्त) को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। उन्होंने विपक्ष को विश्वास में लेकर आगे की कानूनी रणनीति तैयार करने की बात कही है।

साथ ही, शिवकुमार ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय से अपनी बेंगलुरु यात्रा को फिलहाल टालने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा, मौजूदा माहौल सौहार्दपूर्ण नहीं है। मैं चाहता हूं कि हम शांत वातावरण में मिलें ताकि दोनों राज्यों के हित सुरक्षित रहें।

तमिलनाडु का पक्ष दूसरी ओर, तमिलनाडु सरकार और उसके सहयोगी दलों का कहना है कि उन्हें आवंटित हिस्से का बहुत कम पानी मिल रहा है, जिससे लाखों एकड़ कृषि भूमि सूखने की कगार पर है। उनका तर्क है कि केंद्र सरकार को इस मामले में हस्तक्षेप कर तमिलनाडु को उसका वाजिब हक दिलाना चाहिए।

फिलहाल, मानसून की अनिश्चितता और राजनीतिक दबाव के बीच यह विवाद अब एक बार फिर कानूनी और सड़क की लड़ाई के चौराहे पर खड़ा है।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

समुद्र मंथन: 84,084 करोड़ से जागेगा भारत का समुद्री खजाना, ऊर्जा सुरक्षा में आएगा बड़ा बदलाव

Story 1

यूपी चुनाव 2027: चंद्रशेखर आजाद ने फूंका चुनावी बिगुल, 45 सीटों पर प्रत्याशियों का ऐलान

Story 1

शहजाद पूनावाला ने छोड़ी BJP: इस्तीफे के बाद PM मोदी के लिए लिखी ये बड़ी बात!

Story 1

रामायणम् में लारा दत्ता का मॉडर्न लुक देख भड़के फैंस, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

Story 1

मोदी की तेरहवीं से चर्चा में आई नीशू आजाद फिर विवादों में, पैसों के लिए कर रहीं संदिग्ध ट्रेडिंग ऐप का प्रचार

Story 1

कैंसर का इलाज क्रोसिन से नहीं : नीट पेपर लीक पर राघव चड्ढा का संसद में जोरदार प्रहार

Story 1

{ रामायण का ट्रेलर देख फैंस को याद आए रणवीर! रावण के लुक में एक्टर की AI फोटो ने मचाया हड़कंप}

Story 1

PM किसान: किसानों के लिए खुशखबरी! 2031 तक खाते में आते रहेंगे 6,000 रुपये, जानें कब आएगी 24वीं किस्त

Story 1

रणबीर कपूर की रामायण : क्या टीवी के कृष्ण निभाएंगे भगवान विष्णु का किरदार? वायरल थ्योरीज ने बढ़ाई हलचल

Story 1

NEET पेपर लीक पर राघव चड्ढा की चुप्पी का सच: शोर नहीं, अब ठोस समाधान पर काम