पीएम मोदी पर अभद्र टिप्पणी: छात्रा पर FIR के बाद छिड़ा सियासी संग्राम, जानें किसने क्या कहा
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दिल्ली/नोएडा: दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए छात्र आंदोलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वाली रुचिका सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट की वकील स्मृति सिंह चंदेल की शिकायत पर नोएडा पुलिस ने रुचिका के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। चूंकि मामला दिल्ली की सीमा से जुड़ा था, इसलिए इसे जीरो एफआईआर के तहत आगे बढ़ाया गया है।

क्या है वायरल वीडियो का मामला? छात्र आंदोलन के दौरान रुचिका सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था। इस वीडियो में उन्हें प्रधानमंत्री के लिए आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करते देखा गया, जिसके बाद से ही राजनीतिक और कानूनी गलियारों में तीव्र प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

CJP का तीखा ऐतराज: क्या बोले सौरव दास? इस कार्रवाई पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग बताते हुए कहा, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ क्रिमिनल कानूनी कार्रवाई करना निंदनीय है। भले ही भाषा गलत हो सकती है और किसी को आपत्तिजनक लग सकती है, लेकिन यह किसी के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने का आधार नहीं हो सकता।

युवाओं को दी सतर्क रहने की सलाह सौरव दास ने आगे कहा कि वे युवा पीढ़ी से अपील करते हैं कि वे अपने शब्दों के चयन को लेकर बेहद सावधान रहें। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस को किसी भी राजनीतिक मकसद के लिए अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा, यह कदम लोगों में डर पैदा करने वाला है और इसे किसी भी तरह से तर्कसंगत नहीं माना जा सकता।

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा का बचाव इस विवाद में कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने भी रुचिका का बचाव किया है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, अपशब्द का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, लेकिन अगर घर का बच्चा गलती कर दे, तो क्या केस दर्ज करना सही है? वह महज एक छात्रा है, लेकिन पूरा राइट-विंग इकोसिस्टम उसके पीछे पड़ गया है और उसकी निजी जानकारी सार्वजनिक की जा रही है।

दिल्ली पुलिस की भी पैनी नजर रुचिका सिंह का यह वीडियो सामने आने के बाद दिल्ली पुलिस भी हरकत में बताई जा रही है। आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर पुलिस अब सोशल मीडिया पर नजर रख रही है। यह मामला एक बार फिर अभिव्यक्ति की आजादी और उसकी सीमाओं के बीच के पतले अंतर पर बहस छेड़ गया है।

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