चीन दुनिया की फैक्टरी है, लेकिन अब उसके उत्पाद राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक अदृश्य खतरा बनते जा रहे हैं। अमेरिका ने चीन में बने स्मार्ट पावर इन्वर्टर्स को अपनी कवर्ड लिस्ट में डालते हुए इनके आयात पर कड़ा प्रतिबंध लगा दिया है। आशंका है कि ये इन्वर्टर भविष्य में किसी भी देश के पावर ग्रिड को पल भर में ठप करने का माध्यम बन सकते हैं।
अमेरिका का सख्त प्रहार अमेरिकी फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) ने स्पष्ट कर दिया है कि चीन निर्मित कनेक्टेड पावर इन्वर्टर्स उनके महत्वपूर्ण ऊर्जा ढांचे के लिए जोखिम हैं। अमेरिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए अब इन इन्वर्टर्स के नए मॉडलों को मंजूरी देना बंद कर दिया है। यह फैसला अमेरिका की उस नीति का हिस्सा है जिसके तहत वह विदेशी तकनीकी निर्भरता को कम करना चाहता है।
कैसे इन्वर्टर बन सकते हैं हथियार? पुराने इन्वर्टर केवल बिजली बदलने का काम करते थे, लेकिन आधुनिक स्मार्ट इन्वर्टर इंटरनेट, क्लाउड और रिमोट सॉफ्टवेयर अपडेट से लैस होते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन इन्वर्टर्स का नियंत्रण किसी विदेशी संस्था के हाथ में चला जाए, तो वे एक साथ मिलकर बिजली उत्पादन को घटा सकते हैं या ग्रिड की फ्रीक्वेंसी बिगाड़ सकते हैं। इससे किसी भी क्षेत्र की बिजली आपूर्ति को नियंत्रित या बाधित करना आसान हो जाता है।
भारत के लिए क्यों है यह चिंता का विषय? भारत का सोलर इन्वर्टर बाजार करीब 4 अरब डॉलर का है और यह तेजी से बढ़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि भारतीय बाजार में चीनी कंपनियों का दबदबा है और स्मार्ट इन्वर्टर सेगमेंट में उनकी हिस्सेदारी करीब 80 फीसदी है। Sungrow, Growatt, Solis और Sineng जैसी चीनी कंपनियों के उत्पाद भारत के सोलर प्रोजेक्ट्स में धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहे हैं।
भारत की स्थिति और चुनौती भारत 2030 तक 500 गीगावाट ग्रीन एनर्जी का लक्ष्य लेकर चल रहा है। इस लक्ष्य को पाने की जल्दी में लागत कम रखने के लिए चीनी इन्वर्टर्स पर निर्भरता बढ़ गई है। हालांकि भारत ने कुछ सरकारी परियोजनाओं के लिए डेटा लोकलाइजेशन जैसे नियम बनाए हैं, लेकिन अमेरिका जैसी व्यापक और आक्रामक रोक अभी तक नहीं लगाई गई है।
क्या ग्रिड पूरी तरह फेल हो सकता है? ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि खतरा काल्पनिक नहीं है। हालांकि एक बटन दबाते ही पूरा ग्रिड बंद हो जाना तकनीकी रूप से कठिन है क्योंकि ग्रिड प्रबंधन की कई अन्य सुरक्षा परतें भी होती हैं। फिर भी, इन इन्वर्टर्स के जरिए होने वाला साइबर हमला ग्रिड पर भारी दबाव डाल सकता है। भारत के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती है—सस्ती तकनीक और ऊर्जा सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना।
Months ago I signed a letter warning that Chinese-made power inverters were quietly wired into our electric grid, capable of handing an adversary the keys to America s power supply.
— Congressman Pat Harrigan (@RepPatHarrigan) July 30, 2026
This week that warning was confirmed and acted on: the @FCC just banned new imports after… pic.twitter.com/iXODLInBVy
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