हॉकी की नई केसरिया जर्सी पर घमासान: क्या यह बदलाव खेल है या सियासत?
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भारतीय हॉकी टीम की नई जर्सी का रंग नीला से बदलकर केसरिया क्या हुआ, देश में सियासी तूफान आ गया है। आगामी FIH हॉकी विश्व कप के लिए जारी इस जर्सी को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। जहां एक तरफ इसे राष्ट्रीय गौरव से जोड़ा जा रहा है, वहीं विपक्षी दल इसे भगवाकरण की राजनीति करार दे रहे हैं।

प्रियंका गांधी ने साधा निशाना

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस बदलाव पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बीजेपी का नाम लिए बिना कहा कि जर्सी का रंग बदलने या इतिहास को फिर से लिखने की कोशिश करने से देश की मूल भावना नहीं बदली जा सकती। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की आत्मा भाईचारे और प्रेम पर आधारित है, जिसे कोई भी राजनीतिक हथकंडा हिला नहीं सकता।

खेल को राजनीति से दूर रखें

विपक्ष के अन्य नेताओं ने भी कड़ा रुख अपनाया है। कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने इसे बीजेपी की केसरिया मानसिकता बताया और अपील की कि खेल को धर्म और राजनीति से दूर रखा जाए। वहीं, सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने आरोप लगाया कि सरकार वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे प्रतीकात्मक विवाद खड़े करती है।

हॉकी इंडिया की दलील: विजिबिलिटी ही असली वजह

विवादों के बीच हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप कुमार तिर्की ने सफाई दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह बदलाव राजनीतिक नहीं, बल्कि तकनीकी है। तिर्की के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हॉकी के अधिकांश मैदान (एस्ट्रो टर्फ) नीले रंग के होते हैं। खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ ने सुझाव दिया था कि नीला मैदान और नीली जर्सी के कारण खेल के दौरान विजिबिलिटी में दिक्कत आती है। इसलिए, राष्ट्रीय ध्वज के रंगों में शामिल ऑरेंज रंग को चुना गया।

एक्सपर्ट्स और पूर्व खिलाड़ियों की मिली-जुली राय

भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान विरेन रस्किन्हा ने इसे लेकर निराशा जताई है। उनका मानना है कि ब्लू जर्सी भारतीय टीम की वैश्विक पहचान रही है। हालांकि, पूर्व क्रिकेटर और सांसद कीर्ति आजाद का तर्क अलग है। उन्होंने कहा कि सफलता कपड़ों के रंग से नहीं, बल्कि मैदान पर किए गए प्रदर्शन से मिलती है।

जर्सी का इतिहास: क्या यह पहली बार है?

यह ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग पहली बार नहीं बदला है। इससे पहले 2014 में जर्सी का रंग पीला था, जिसे बाद में 2018 में नीला कर दिया गया था। हालांकि, इस बार केसरिया रंग के चयन ने इसे पिछले बदलावों से कहीं अधिक चर्चा में ला दिया है।

भाजपा का पलटवार

विपक्ष के हमलों पर भाजपा ने भी पलटवार किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि केसरिया रंग भारत की सांस्कृतिक पहचान है और इस पर आपत्ति जताना छोटी मानसिकता है। भाजपा सांसदों ने स्पष्ट किया कि जर्सी का रंग बदलने का निर्णय लेने का अधिकार संबंधित संस्थाओं का है और इसमें राजनीति ढूंढना गलत है।

फिलहाल, खेल के मैदान पर भारत का प्रदर्शन ही इस विवाद को शांत कर सकता है, लेकिन यह साफ है कि खेल के प्रतीकों का राजनीतिकरण अब एक नई बहस को जन्म दे चुका है।

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