ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय पैरा-एथलीट शिल्पा के. शायला का कांस्य पदक जीतना सिर्फ एक जीत नहीं, बल्कि भारतीय कोच की सतर्कता और तकनीकी समझ की बड़ी मिसाल बन गया है। इस पदक के पीछे की कहानी किसी थ्रिलर से कम नहीं है।
क्या था पूरा मामला? वीमेंस शॉटपुट F57 इवेंट में नाइजीरियाई एथलीट यूचारिया इयाजी ने कांस्य पदक पर कब्जा जमा लिया था। उस समय तक भारत की शिल्पा के. शायला पदक की दौड़ से बाहर दिख रही थीं। लेकिन भारतीय दल के हेड कोच केआर सत्यनारायण शिमोगा की पैनी नजरों ने कुछ ऐसा देख लिया जो वहां मौजूद अधिकारियों और कमेंटेटरों से भी चूक गया था।
कोच ने कैसे पकड़ी चोरी ? F57 कैटेगरी के नियमों के अनुसार, एथलीट को गोला फेंकते समय अपनी कुर्सी या फ्रेम से हिप्स (कूल्हे) को उठाए बिना थ्रो करना होता है। कोच सत्यनारायण ने गौर किया कि नाइजीरियाई खिलाड़ी गोला फेंकते समय अपने हिप्स का इस्तेमाल कर रही थीं, जिससे उन्हें अतिरिक्त ऊर्जा और दूरी मिल रही थी। यह सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन था।
बिना समय गंवाए दर्ज कराया प्रोटेस्ट कोच सत्यनारायण ने खेल की तकनीकी बारीकियों को समझते हुए तुरंत कॉमनवेल्थ गेम्स की तकनीकी समिति के पास आधिकारिक प्रोटेस्ट दर्ज कराया। उन्होंने सिर्फ शिकायत नहीं की, बल्कि अपने दावे के समर्थन में वीडियो फुटेज और साक्ष्य भी अधिकारियों को सौंपे।
तकनीकी जांच में सच आया सामने भारत के इस विरोध के बाद खेल परिसर में तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई, जहां नाइजीरियाई टीम के अधिकारियों ने कड़ी बहस की। हालांकि, तकनीकी समिति ने जब हाई-स्पीड कैमरों और वीडियो रीप्ले की बारीकी से जांच की, तो कोच सत्यनारायण का दावा सही साबित हुआ। नाइजीरियाई खिलाड़ी के थ्रो को फाउल घोषित करते हुए अमान्य कर दिया गया।
भारत की झोली में आया पदक इस तकनीकी बदलाव के बाद अंकतालिका (Points Table) में फेरबदल हुआ। फाउल घोषित होते ही नाइजीरियाई एथलीट दौड़ से बाहर हो गईं और लाभ सीधे तौर पर भारत की शिल्पा के. शायला को मिला। भारतीय कोच की इसी चीते जैसी नजर और तुरंत लिए गए सटीक फैसले ने हारी हुई बाजी को भारत के पदक में बदल दिया, जिसे अब खेल जगत में एक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।
*🏅 Congratulations, Shilpa K. Shyla! 🇮🇳
— Mayank Burmee (@BurmeeM) July 29, 2026
Winning the Bronze Medal in the Women s Shot Put F57 at the Commonwealth Games Glasgow 2026 is a remarkable achievement.
Your contribution to India s first-ever para-athletics double podium at the Commonwealth Games is a proud moment for… pic.twitter.com/EUp7hbU0QW
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