महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर अपने बचपन के कोच रमाकांत आचरेकर को एक भावुक श्रद्धांजलि दी है। सचिन ने अपने ट्विटर (एक्स) हैंडल पर कोच के साथ पुरानी तस्वीरें साझा करते हुए उन्हें याद किया।
एक और धन्यवाद अभी बाकी है सचिन ने अपने संदेश में लिखा, आज यहां खड़े होकर कुछ एहसास हुआ। चाहे कितने भी साल बीत जाएं, मुझे हमेशा लगता है कि एक और धन्यवाद कहना बाकी रह गया है। मुझ पर विश्वास करने, मेरा मार्गदर्शन करने और मुझे वह इंसान बनाने के लिए शुक्रिया, जो मैं आज हूं।
तेंदुलकर के लिए आचरेकर सर केवल एक कोच नहीं, बल्कि उनके जीवन के सबसे बड़े मार्गदर्शक थे। अपने गुरु के जीवित रहते हुए, सचिन हर साल गुरु पूर्णिमा पर उनके घर जाकर आशीर्वाद लेते थे। आज भी उन्होंने उसी परंपरा का पालन किया है।
असाधारण प्रतिभा के पारखी रमाकांत आचरेकर को भारतीय क्रिकेट के सबसे महान कोचों में गिना जाता है। उन्होंने सचिन तेंदुलकर की असाधारण प्रतिभा को बहुत कम उम्र में ही पहचान लिया था। आचरेकर सर के कड़े अनुशासन और मार्गदर्शन का ही परिणाम था कि सचिन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे अधिक रन बनाने और 100 शतकों का कीर्तिमान स्थापित किया।
छात्रों के समर्थन में उठी आवाज इससे पहले, सचिन तेंदुलकर ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के प्रति भी अपना समर्थन जताया था। उन्होंने अपने पिता की दी हुई सीख को याद करते हुए कहा था कि जीवन में शॉर्टकट अपनाना सही नहीं है।
सचिन ने जोर दिया कि समाज में परिणामों से कहीं अधिक मेहनत को महत्व मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, हमें एक ऐसी संस्कृति बनानी होगी जहां ईमानदारी को प्रोत्साहन मिले और योग्यता की जीत हो। यदि छात्रों को लगता है कि उनकी मेहनत का सम्मान नहीं हुआ, तो उनकी निराशा जायज है।
तेंदुलकर ने विश्वास जताया कि समाज मिलकर ऐसी व्यवस्था बनाएगा, जो आने वाली पीढ़ी की आकांक्षाओं की रक्षा कर सके और उन्हें एक उज्ज्वल भविष्य दे सके।
Standing here today, I realised something. No matter how many years pass, I’ll always feel like I have one more ‘thank you’ left to say.
— Sachin Tendulkar (@sachin_rt) July 29, 2026
Thank you for believing in me, guiding me, and helping me become the person I am.
Happy Guru Purnima, Achrekar Sir. pic.twitter.com/PzgaXztl1s
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