नई दिल्ली: राज्यसभा में बुधवार को छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के आरोपों का पुरजोर खंडन किया और पुलिसिया कार्रवाई को पूरी तरह जायज ठहराया।
कानून हाथ में न लें प्रदर्शनकारी सदन में हंगामे के बीच जेपी नड्डा ने स्पष्ट किया कि दिल्ली पुलिस की कार्रवाई किसी भी तरह से बदले की भावना से प्रेरित नहीं थी। उन्होंने इसे ‘सामान्य कानून-व्यवस्था’ का मामला बताते हुए कहा कि जो छात्र कानून को अपने हाथों में लेते हैं, उन्हें उसके परिणामों के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि पुलिस प्रशासन का काम शांति व्यवस्था बनाए रखना है और उस दिन भी वही किया गया।
इमरजेंसी की यादें ताजा कीं बहस के दौरान नड्डा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए 1975 के आपातकाल का जिक्र छेड़ दिया। उन्होंने कहा, मैं खुद एक छात्र कार्यकर्ता रहा हूं। कांग्रेस के शासनकाल में जब देश में इमरजेंसी लगी थी, तब मुझे कई बार क्लासरूम से गिरफ्तार किया गया था। यह छात्र आंदोलन का एक हिस्सा है जिसे हर कार्यकर्ता को झेलना पड़ता है।
विपक्ष पर राजनीति का आरोप केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष पर इस मुद्दे को बेवजह सनसनीखेज बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल इस मामूली कानून-व्यवस्था की स्थिति को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं। नड्डा ने कहा कि छात्र आंदोलन करना चाहते हैं तो करें, लेकिन कानून का उल्लंघन होने पर पुलिस अपनी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है और उसे रोका नहीं जा सकता।
विपक्ष का विरोध जारी मल्लिकार्जुन खरगे और अन्य विपक्षी नेताओं का आरोप है कि सरकार शिक्षण संस्थानों में पुलिस के हस्तक्षेप के जरिए छात्रों की आवाज दबाना चाहती है। हालांकि, सरकार ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
When I was a student activist, I was arrested many times from my classroom during the Emergency, when the Congress Party was in power. Such circumstances are a part of a student activist s journey. pic.twitter.com/9z4CUuuNvt
— Jagat Prakash Nadda (@JPNadda) July 29, 2026
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