PoK में भड़की हिंसा, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ बोले– ये भारत जैसे दुश्मन, कोई बातचीत नहीं होगी
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पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हालात बेकाबू हो गए हैं। स्थानीय लोगों के व्यापक विरोध-प्रदर्शनों के बीच पाकिस्तानी सेना और पुलिस की कार्रवाई ने तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। अब तक हुई हिंसा में 100 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।

प्रदर्शनकारी भारत की तरह दुश्मन

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने आग में घी डालने का काम किया है। एक टीवी इंटरव्यू में उन्होंने प्रदर्शनकारियों को देश का दुश्मन करार देते हुए दो टूक कहा कि वे इन लोगों के साथ किसी भी स्तर पर बातचीत नहीं करेंगे। आसिफ ने कहा, मैं PoK के प्रदर्शनकारियों को उसी नजरिए से देखता हूं जैसे भारत को। वे पाकिस्तान के दुश्मन हैं। इस बयान के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश और बढ़ गया है।

क्या है 12 शरणार्थी सीटों का विवाद?

PoK विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं। इनमें से 45 पर सीधे चुनाव होते हैं, जबकि 12 सीटें उन कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं जो 1947 में जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान गए थे। इन सीटों के मतदाता PoK में नहीं, बल्कि पाकिस्तान के अन्य प्रांतों में रहते हैं।

JAAC का विरोध क्यों?

जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) का आरोप है कि इन 12 सीटों का उपयोग करके इस्लामाबाद की सरकार PoK की राजनीति में दखल देती है और चुनाव नतीजों को प्रभावित करती है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि PoK की सरकार चुनने का अधिकार सिर्फ वहां के मूल निवासियों को होना चाहिए। विपक्षी दल जैसे PTI ने भी इस चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

क्या हुआ मंगलवार को?

मंगलवार को रावलाकोट से मुजफ्फराबाद की ओर करीब 5 हजार लोग मार्च निकाल रहे थे। JAAC के अनुसार, सुरक्षाबलों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बिना उकसावे के गोलियां चलाईं, जिसमें 30 लोगों की मौत हो गई। वहीं, पाकिस्तानी सरकार का दावा है कि प्रदर्शनकारी हथियारों से लैस थे और उन्होंने पहले सुरक्षा बलों पर हमला किया।

PoK में अब क्या हालात हैं?

हिंसा के बाद पूरे इलाके में अघोषित कर्फ्यू जैसे हालात हैं। पाकिस्तान सरकार ने सेना और अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती कर दी है। कई इलाकों में इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया गया है और धारा-144 लागू है। JAAC ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताया है, जबकि प्रशासन इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम बता रहा है।

तनाव के बीच यह सवाल गहराई से उभर रहा है कि क्या पाकिस्तान सरकार इन प्रदर्शनों को कुचलने में सफल होगी, या यह असंतोष PoK में पाकिस्तान की पकड़ को ही कमजोर कर देगा?

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