क्या अब ‘धुरी’ बनेंगे जेलेंस्की और नेतन्याहू? वॉशिंगटन में हुई मुलाकात से बढ़ी वैश्विक हलचल
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वॉशिंगटन में हाल ही में संपन्न हुई एक अनौपचारिक भेंट ने कूटनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मुलाकात ने उन अटकलों को हवा दे दी है कि क्या रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य-पूर्व का तनाव अब एक साझा मोर्चे में तब्दील हो रहा है।

इतिहास के पन्नों में दोहराता 1914? विशेषज्ञों का मानना है कि आज की वैश्विक स्थिति प्रथम विश्व युद्ध (1914) के पूर्व के दौर जैसी है। जिस तरह तब छोटे-छोटे क्षेत्रीय संघर्षों ने मिलकर एक महायुद्ध का रूप ले लिया था, वैसा ही खतरा आज मंडरा रहा है। जेलेंस्की और नेतन्याहू का एक मंच पर आने का संदेश स्पष्ट है—दोनों देश रूस और ईरान के बढ़ते गठजोड़ (एक्सिस) से सीधे प्रभावित हैं।

कैस्पियन सागर बना नया रणक्षेत्र तनाव अब कैस्पियन सागर तक पहुंच गया है। जेलेंस्की ने दावा किया है कि यूक्रेन ने रूस को हथियारों की आपूर्ति करने वाले ईरानी जहाजों को निशाना बनाया है। वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इसे नागरिक जहाज पर हमला करार दिया है और बदले की चेतावनी दी है। यह घटनाक्रम युद्ध के दायरे को और विस्तृत करता जा रहा है।

तेहरान-मॉस्को की बढ़ती सैन्य जुगलबंदी यूक्रेन ने स्पष्ट आरोप लगाया है कि ईरान केवल शाहिद ड्रोन ही नहीं, बल्कि सैन्य तकनीक भी रूस को दे रहा है। जेलेंस्की अब वॉशिंगटन को यह समझाने में जुटे हैं कि यूक्रेन की मदद करना वास्तव में ईरान के उस नेटवर्क को कमजोर करना है जो इजरायल के लिए भी खतरा है। यह रणनीतिक तालमेल अब दोनों युद्धों को एक-दूसरे से जोड़ रहा है।

ट्रंप की कूटनीतिक चुनौती इन सबके बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक कठिन संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। जेलेंस्की ने ट्रंप को खुफिया जानकारी दी है कि रूस ने अमेरिकी ठिकानों के खिलाफ ईरान की मदद की है। हालांकि, ट्रंप ने फिलहाल इस दावे पर सावधानी बरतते हुए कहा है कि वह पुतिन से इस बारे में सीधी बात करेंगे। फिलहाल, अमेरिका किसी भी बड़े सैन्य निर्णय से पहले पुख्ता सबूतों का इंतजार कर रहा है।

निष्कर्ष जेलेंस्की और नेतन्याहू की यह मुलाकात महज औपचारिक नहीं लगती। यह संकेत है कि ईरान और रूस के खिलाफ वे एक साझा कूटनीतिक जमीन तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं। यदि ये दोनों युद्ध आपस में और मजबूती से जुड़ते हैं, तो दुनिया एक बड़े वैश्विक संकट की दहलीज पर खड़ी होगी।

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