पेपर लीक पर सरकार को घेरा: शशि थरूर का तीखा सवाल- 3 महीने में केस निपटाने का प्लान क्या है?
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लोकसभा के मॉनसून सत्र में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकार के दावों पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कानून की प्रभावशीलता और जमीनी हकीकत पर गंभीर चिंता जताई है।

क्या 3 महीने में न्याय संभव है? थरूर ने विधेयक के उस प्रावधान पर सीधा हमला बोला जिसमें मामलों को तीन महीने के भीतर निपटाने का दावा किया गया है। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या यह लक्ष्य केवल कागजों तक सीमित है? उन्होंने स्पष्ट रूप से पूछा कि इस समयसीमा को हासिल करने के लिए क्या सरकार जजों की संख्या बढ़ाएगी? क्या अलग से सरकारी वकील नियुक्त किए जाएंगे और फॉरेंसिक लैब की क्षमता को बढ़ाया जाएगा?

स्पेशल टास्क फोर्स का सच क्या है? विधेयक में प्रस्तावित स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के ढांचे पर भी थरूर ने संदेह जताया। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि इस फोर्स में कौन से अधिकारी होंगे और उनकी योग्यता क्या होगी? उन्होंने यह भी पूछा कि किन परिस्थितियों में मामले इस फोर्स को सौंपे जाएंगे। थरूर का मानना है कि जब तक जांचकर्ता और आरोपी दोनों एक ही प्रशासनिक ढांचे के अधीन होंगे, तब तक निष्पक्षता पर सवाल उठते रहेंगे।

छात्रों के भविष्य और सिस्टम पर प्रहार शशि थरूर ने नीट पेपर लीक से प्रभावित लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि माता-पिता अपनी जमापूंजी बच्चों के सपनों पर लगाते हैं, लेकिन अंत में उन्हें केवल निराशा मिलती है। उन्होंने जोर दिया कि आधुनिक तकनीक के दौर में साइबर तरीके से पेपर लीक होना पूरे शिक्षा तंत्र को कठघरे में खड़ा करता है।

2014 से 2026 तक की विफलता पर सवाल थरूर ने सरकार के 12 साल के कार्यकाल पर भी निशाना साधा। उन्होंने पूछा कि पिछले 12 वर्षों में सरकार ऐसी पारदर्शी व्यवस्था क्यों नहीं बना पाई, जिससे परीक्षाएं सुरक्षित तरीके से आयोजित हो सकें? उन्होंने मांग की कि दोषियों को पकड़ने के लिए एक उच्च-स्तरीय कमेटी गठित की जाए और एनटीए (NTA) की संपूर्ण कार्यप्रणाली की गहन समीक्षा की जाए।

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