PoJK में दहला पाकिस्तान: सेना की गोलीबारी में 91 लोगों की बलि, भारत ने घेरा तो मची हलचल
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पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में हालात बेकाबू हो गए हैं। स्थानीय लोगों के दमन के खिलाफ चल रहा आंदोलन अब खूनी संघर्ष में बदल चुका है। पिछले 52 दिनों से जारी विरोध प्रदर्शनों ने अब पाकिस्तान सरकार और वहां की सेना के खिलाफ एक बड़ी जंग का रूप ले लिया है।

बातचीत विफल, सेना ने बरसाईं गोलियां PoJK में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) और प्रशासन के बीच बातचीत विफल रहने के बाद हजारों प्रदर्शनकारी मुजफ्फराबाद की ओर मार्च कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि हिरासत में लिए गए नेताओं को रिहा किया जाए और उन पर दर्ज फर्जी मुकदमे वापस लिए जाएं। लेकिन प्रशासन ने बातचीत के बजाय गोलियों का सहारा लिया। रावलकोट में हुई इस अंधाधुंध फायरिंग में 17 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि दर्जनों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

52 दिनों का संघर्ष, 91 जानें गई PoJK के लोग पिछले करीब दो महीनों से भीषण आर्थिक बदहाली और प्रशासनिक दमन के खिलाफ सड़कों पर हैं। स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार की हिंसा के बाद इस पूरे आंदोलन में मरने वालों की कुल संख्या 91 तक पहुंच गई है। रावलकोट की घटना के बाद पूरे इलाके में डर और गुस्से का माहौल है। चश्मदीदों का कहना है कि गोलीबारी इतनी भयावह थी कि आम नागरिकों में अफरा-तफरी मच गई।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की गुहार घटना का शिकार हुए लोगों और प्रदर्शनकारियों ने अब संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक मानवाधिकार संगठनों से दखल की मांग की है। सोशल मीडिया के जरिए दुनिया को संदेश देते हुए स्थानीय लोगों ने कहा है कि पाकिस्तान सरकार निर्दोष नागरिकों की आवाज को ताकत के दम पर दबा रही है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मीडिया से भी इस अघोषित नरसंहार पर संज्ञान लेने की अपील की है।

भारत की दो टूक: अवैध कब्जा और मानवाधिकार हनन PoJK में पाकिस्तान द्वारा आयोजित तथाकथित चुनावी प्रक्रिया पर भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इसे पाकिस्तान का एक और ढकोसला करार दिया। भारत ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का पूरा क्षेत्र भारत का अभिन्न हिस्सा है, जिसमें PoJK भी शामिल है।

पाकिस्तान अपनी नीतियां बदले भारत ने PoJK में हो रहे विरोध प्रदर्शनों को पाकिस्तान की विफल नीतियों का परिणाम बताया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, वहां के लोगों का आक्रोश आर्थिक शोषण और लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन के खिलाफ है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने यह बात मजबूती से रखी है कि पाकिस्तान को अपने अवैध कब्जे को समाप्त करना चाहिए और मानवाधिकारों के उल्लंघन पर जवाब देना चाहिए।

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