लोकसभा में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा द्वारा नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी पर की गई टिप्पणी ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। प्रियंका ने मंत्री की नियुक्ति और उनके अतीत को लेकर तीखे सवाल उठाए, जिस पर सत्ता पक्ष ने कड़ा रुख अपनाया है।
मंत्री पर प्रियंका के गंभीर आरोप प्रियंका गांधी ने सदन में आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने ऐसे व्यक्ति को शिक्षा मंत्रालय सौंपा है, जिन्होंने अतीत में एक गर्भवती महिला के साथ बलात्कार के दोषियों की रिहाई पर न केवल सहमति जताई थी, बल्कि खुशी भी जाहिर की थी। उन्होंने इसे देश की करोड़ों महिलाओं के लिए गलत संदेश करार दिया।
किरेन रिजिजू का पलटवार संसद में इस बयान पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह सदन के भीतर चरित्र हनन का मामला है। रिजिजू ने मांग की कि प्रियंका के बयानों को रिकॉर्ड से हटाया जाए और उन्हें सदन में माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी अपमानजनक भाषा की उम्मीद संसदीय मर्यादा के अनुरूप नहीं है।
प्रियंका सबूत पेश करें या माफी मांगें : प्रह्लाद जोशी विवाद के केंद्र में रहे शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने आरोपों का खंडन करते हुए प्रियंका गांधी पर जमकर निशाना साधा। जोशी ने कहा, प्रियंका गांधी को अपने आरोपों को प्रमाणित करना चाहिए। क्या कोई भी कुछ भी झूठ बोलकर बच सकता है? उन्होंने लोकसभा स्पीकर से प्रियंका को सदन से निष्कासित करने की मांग की।
सबूत देने को तैयार प्रियंका संसद से बाहर निकलने के बाद जब पत्रकारों ने प्रियंका गांधी से उनके आरोपों की पुष्टि के बारे में पूछा, तो उन्होंने कहा कि वह पीछे हटने वाली नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके पास उस समय का वीडियो मौजूद है और वह उचित प्रक्रिया के तहत इसे सदन और सार्वजनिक पटल पर प्रमाण के साथ पेश करेंगी।
शिक्षा व्यवस्था पर भी उठाए सवाल प्रियंका ने केवल मंत्री पर ही नहीं, बल्कि पूरी शिक्षा प्रणाली पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में आरएसएस प्रचारकों को भरकर उसे खोखला कर दिया है। उन्होंने कहा कि NTA के जरिए सिस्टम को केंद्रीकृत किया गया है। साथ ही, पिछले एक दशक में 152 बार पेपर लीक होने का दावा करते हुए कहा कि एक भी दोषी को सजा नहीं मिली है।
#WATCH कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा, प्रियंका जी को अपने बयानों को प्रमाणित करना चाहिए था। फैलाई जा रही गलत सूचना के संबंध में कार्रवाई की जानी चाहिए। क्या कोई कुछ भी कह सकता है और इससे बच सकता है?...… https://t.co/pLOzQAQKMi pic.twitter.com/vwXfItRa02
— ANI_HindiNews (@AHindinews) July 28, 2026
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