कारवां गुजर गया, गुबार देखते रहे : संसद में गोगोई का तंज, सरकार से पूछा- छात्रों पर पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया?
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लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार पर तीखे हमले किए। उन्होंने इस विधेयक को मोदी सरकार की विफलता का स्मारक करार दिया।

नीरज की पंक्तियों से घेरा अपनी बात रखते हुए गोगोई ने प्रसिद्ध गीतकार नीरज की पंक्तियां, कारवां गुजर गया, गुबार देखते रहे सुनाईं। उन्होंने इस कविता के जरिए सरकार की कार्यप्रणाली पर तंज कसा और कहा कि सरकार केवल दिखावे के लिए कानून ला रही है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है।

2024 के कानून की नाकामयाबी गोगोई ने दावा किया कि 2024 में लाया गया मूल कानून भी पेपर लीक रोकने में पूरी तरह विफल रहा। उन्होंने याद दिलाया कि उसी वर्ष नीट-यूजी पेपर लीक जैसा बड़ा घोटाला सामने आया, जिसमें 45 लोग आरोपी बने, लेकिन मास्टरमाइंड समेत कई लोगों को आसानी से जमानत मिल गई।

धर्मेंद्र प्रधान के स्वागत पर सवाल पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के संसद परिसर में स्वागत को लेकर भी गोगोई ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यह शर्मनाक है कि पूर्व मंत्री का ऐसा स्वागत किया गया जैसे वे कोई बड़ी जंग जीतकर आए हों, जबकि उनके कार्यकाल में ही शिक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में रही।

एनटीए और राधाकृष्णन समिति पर निशाना कांग्रेस सांसद ने एनटीए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब महानिदेशक को बदला गया, तो चेयरमैन को क्यों बरकरार रखा गया? उन्होंने आरोप लगाया कि चेयरमैन एक विशेष संगठन से जुड़े हैं और उनका पिछला रिकॉर्ड भी विवादित रहा है। इसके साथ ही उन्होंने राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों के सार्वजनिक न होने पर सरकार से जवाब मांगा।

पैलेट गन के इस्तेमाल पर सीधा सवाल चर्चा के दौरान गोगोई ने दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह से सीधा सवाल पूछा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज और पैलेट गन का इस्तेमाल करने का आदेश किसने दिया था?

शिक्षा का वैचारिक एजेंडा गोगोई ने आरोप लगाया कि सरकार का ध्यान शिक्षा सुधार पर नहीं, बल्कि उसे एक विशेष विचारधारा के प्रचार का माध्यम बनाने पर है। उन्होंने साफ कहा कि केवल जुर्माने की राशि बढ़ाने से शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं होगा, बल्कि इसके लिए सरकार को अपनी मंशा और कार्यप्रणाली में बदलाव करना होगा।

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