एनटीए का गणित फंसा: 34 पदों वाली संस्था में 47 अफसरों पर कार्रवाई कैसे? संसद में गौरव गोगोई के तीखे सवाल
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संसद में नीट पेपर लीक और शिक्षा प्रणाली पर चल रही चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार पर जोरदार हमला बोला है। पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मींस) संशोधन विधेयक 2026 पर बोलते हुए उन्होंने सरकार के दावों की धज्जियां उड़ा दीं।

पद 34, कार्रवाई 47 पर: यह कैसा सच? गोगोई ने सबसे बड़ा सवाल एनटीए (NTA) की कार्यप्रणाली पर उठाया। उन्होंने सरकार से पूछा, जब एनटीए में कुल स्वीकृत पद ही 34 हैं और उनमें से भी 10-12 पद खाली पड़े हैं, तो सरकार ने 47 अधिकारियों पर कार्रवाई करने का दावा कैसे किया? उन्होंने इसे जनता की आंखों में धूल झोंकने वाला कदम करार दिया।

चेयरमैन पर मेहरबानी क्यों? एनटीए के महानिदेशक को हटाने पर गोगोई ने कहा कि केवल चेहरा बदला गया है, व्यवस्था नहीं। उन्होंने सवाल किया कि दागदार इतिहास वाले चेयरमैन को अभी भी पद पर क्यों बनाए रखा गया है? उन्होंने याद दिलाया कि वे मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष रहते हुए भी अनियमितताओं के आरोपों में घिरे रहे थे।

धर्मेंद्र प्रधान सिर्फ एक मुखौटा हैं शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधते हुए गोगोई ने कहा कि छात्र आत्महत्या जैसे गंभीर मुद्दों के बावजूद प्रधान का रवैया असंवेदनशील रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा को अपने वैचारिक एजेंडे के लिए इस्तेमाल करना चाहती है। गोगोई के अनुसार, प्रधान को हटाना समाधान नहीं है, क्योंकि वे सिर्फ एक मुखौटा हैं जो असली सिस्टम को छिपाए हुए हैं।

पेपर लीक का सिलसिला जारी गोगोई ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 2024 में कानून लाने के बावजूद 2026 में पेपर लीक होना सरकार की विफलता का जीता-जागता स्मारक है। उन्होंने कहा कि संजीव मुखिया जैसे मास्टरमाइंड का महीनों तक फरार रहना और फिर आसानी से जमानत मिल जाना, सिस्टम की मिलीभगत को दर्शाता है।

छात्रों का दमन और पुलिस की बर्बरता आंदोलनकारी छात्रों के समर्थन में बोलते हुए गोगोई ने पुलिसिया कार्रवाई की कड़ी निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया और युवतियों के साथ दुर्व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा, एक छात्र ने तो यहां तक कहा कि जिस उंगली से उसने सरकार को वोट दिया था, उसी उंगली को आज पुलिस ने तोड़ दिया है।

असम बाढ़ पर विशेष पैकेज की मांग शिक्षा के मुद्दे के अलावा, गोगोई ने असम में आई विनाशकारी बाढ़ का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि राज्य में 70 लोगों की मौत हो चुकी है और स्थिति बेहद गंभीर है। उन्होंने केंद्र सरकार से तुरंत असम के लिए विशेष राहत पैकेज जारी करने की मांग की।

गोगोई ने अपनी बात समाप्त करते हुए मशहूर शायर वसीम बरेलवी की पंक्तियां दोहराईं— उसूलों पर आंच आए तो टकराना जरूरी है, जिंदा हो तो जिंदा नजर आना जरूरी है। उन्होंने साफ कर दिया कि यह विधेयक महज एक दिखावा है, जिससे वास्तविक सुधार की उम्मीद करना बेमानी है।

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