बचपन में गाई गई नर्सरी राइम ट्विंकल, ट्विंकल, लिटिल स्टार, लाइक अ डायमंड इन द स्काई अब महज एक कल्पना नहीं रही। भारतीय वैज्ञानिकों और उद्यमियों ने इसे हकीकत में बदलकर इतिहास रच दिया है। हैदराबाद की स्काईरूट एयरोस्पेस और बेंगलुरु की कॉसमॉस डायमंड्स ने मिलकर कमल के आकार का एक खास लैब-ग्रोन हीरा अंतरिक्ष में भेजा है।
नर्सरी राइम से अंतरिक्ष तक का सफर इस अनूठे प्रोजेक्ट की शुरुआत एक बिजनेस मीटिंग से हुई। कॉसमॉस डायमंड्स की फाउंडर और ज्वेलरी डिजाइनर संजना टी. की मुलाकात स्काईरूट एयरोस्पेस के को-फाउंडर पवन चंदाना से हुई। बातचीत के दौरान बचपन की इस मशहूर कविता पर चर्चा हुई और दोनों ने इसे सच करने की चुनौती स्वीकार कर ली। इसी का परिणाम है कॉस्मिक ब्लूम , जो अब पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगा रहा है।
कमल के डिजाइन का चुनाव क्यों? टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि अंतरिक्ष में कौन सा प्रतीक भेजा जाए। महीनों के मंथन के बाद कमल को चुना गया। संजना के अनुसार, कमल भारत की सांस्कृतिक विरासत, पवित्रता, ज्ञान और मजबूती का प्रतीक है। इसके अलावा, व्यावहारिक रूप से भी यह डिजाइन सबसे बेहतरीन था क्योंकि यह हर कोण से देखने पर सुंदर दिखता है, जो अंतरिक्ष में लगे कैमरों के लिए सबसे उपयुक्त था।
सूरत की लैब में तैयार हुआ अनोखा हीरा कॉस्मिक ब्लूम को सूरत की एक लैब में अत्याधुनिक तकनीक से तैयार किया गया है। यह न केवल भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को दर्शाता है, बल्कि सस्टेनेबल और इको-फ्रेंडली लैब-ग्रोन हीरों के प्रति वैश्विक रुचि को भी बढ़ावा देता है।
जब अंतरिक्ष में पहली किरण ने इसे छुआ विक्रम 1 मिशन के तहत जब यह हीरा अंतरिक्ष में पहुंचा, तो एक अविस्मरणीय नजारा देखने को मिला। करीब 450 किलोमीटर की ऊंचाई पर 28,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ते हुए हीरे पर जब सूरज की पहली किरण पड़ी, तो वह किसी चमकते हुए दीये की तरह जगमगा उठा।
नए भारत की नई उड़ान यह केवल एक हीरा नहीं है, बल्कि भारतीय युवाओं के नवाचार और उनके हौसलों का एक वैश्विक संदेश है। आज यह कॉस्मिक ब्लूम हर 24 घंटे में 16 बार सूर्योदय और सूर्यास्त का गवाह बन रहा है। इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि यदि दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो बचपन के सपने भी हकीकत का आसमान छू सकते हैं।
A week since launch… and I still can’t stop watching this on loop. ❤️🚀
— Pawan (@PawanKChandana) July 25, 2026
What are the odds that Vikram-1’s very first sunrise in orbit makes its grand entrance through the diamond on board?
Some moments can’t be engineered.
That perfect sun angle happened only because of the… pic.twitter.com/KftlA2X8eJ
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