CJP प्रोटेस्ट: वो 10 विस्फोटक दावे, जो सच होते तो देश में मच जाता कोहराम
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नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का महीने भर चला प्रदर्शन अब थम चुका है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंदोलन तो खत्म हो गया, लेकिन इस दौरान सोशल मीडिया पर फैले फेक न्यूज के जाल ने प्रशासन और आम जनता को हैरान कर दिया। यदि ये 10 दावे सच साबित होते, तो देश में स्थिति गंभीर हो सकती थी।

1. सीजेपी फाउंडर की मौत का फर्जी प्रोपेगेंडा सोशल मीडिया पर एक अखबार की कतरन वायरल हुई, जिसमें सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके की मौत का दावा किया गया। दिल्ली पुलिस ने इसे मनगढ़ंत करार दिया और कड़ी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी। पुलिस ने स्पष्ट किया कि दिपके पूरी तरह सुरक्षित हैं।

2. महिला प्रदर्शनकारी की मौत की भ्रामक खबर जंतर-मंतर पर एक महिला प्रदर्शनकारी की मौत की खबर आग की तरह फैली। मौके पर दिल्ली पुलिस ने फैक्ट चेक जारी कर बताया कि महिला जीवित है और आरएमएल अस्पताल में भर्ती है। वह खतरे से बाहर है।

3. गर्भवती पुलिसकर्मी के गर्भपात का झूठा दावा यह सबसे सनसनीखेज दावा था कि प्रदर्शन के दौरान एक गर्भवती महिला पुलिसकर्मी ने अपना बच्चा खो दिया। पुलिस ने इसे पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि तस्वीरों को गलत संदर्भ में पेश किया गया। महिला को चोटें जरूर आई थीं, लेकिन बच्चा सुरक्षित था।

4. सरकारी वार्ता में फोन छीने जाने का झूठ अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया था कि जेपी नड्डा के आवास पर हुई मीटिंग के दौरान प्रतिनिधियों के फोन छीन लिए गए थे। हालांकि, बैठक की आधिकारिक तस्वीरों में प्रतिनिधियों के पास फोन साफ देखे गए, जिससे दावों की पोल खुल गई।

5. प्रदर्शनकारियों पर FIR की अफवाह संसद मार्च के बाद प्रदर्शनकारियों पर एफआईआर दर्ज होने की खबरें उड़ीं। दिल्ली पुलिस ने इन खबरों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

6. सेना की तैनाती का पाकिस्तान कनेक्शन सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि प्रदर्शन को कुचलने के लिए सेना को दिल्ली में उतारा गया है। भारतीय सेना के फैक्ट चेक ने इसे पाकिस्तान प्रायोजित प्रोपेगेंडा बताया और साफ किया कि कानून-व्यवस्था केवल पुलिस और अर्धसैनिक बलों के हाथ में थी।

7. आधार कार्ड की अनिवार्य एंट्री का सच आरोप लगे कि विरोध प्रदर्शन में एंट्री के लिए आधार कार्ड मांगा जा रहा है। पुलिस ने इसे तथ्यात्मक रूप से गलत बताया और कहा कि किसी भी प्रदर्शनकारी का न तो आधार चेक हुआ और न ही डेटा एकत्र किया गया।

8. थलपति विजय के जंतर-मंतर पहुंचने का भ्रम तमिलनाडु के सीएम थलपति विजय का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें दावा किया गया कि वे प्रदर्शनकारियों का समर्थन करने पहुंचे। जांच में सामने आया कि वह वीडियो काफी पुराना था और जंतर-मंतर से उसका कोई जुड़ाव नहीं था।

9. भजन पर मुस्लिम व्यक्ति के नाचने का पुराना वीडियो प्रदर्शन के दौरान एक मुस्लिम व्यक्ति का भजन पर नाचते हुए वीडियो वायरल हुआ। पड़ताल में पता चला कि यह वीडियो प्रदर्शन शुरू होने से दो महीने पहले (अप्रैल 2026) का था, जिसका इस आंदोलन से कोई लेना-देना नहीं था।

10. विदेशी फंडिंग के दावे पर विदेश मंत्रालय की सफाई सीजेपी प्रदर्शन को विदेशी फंडिंग मिलने की चर्चाओं पर विदेश मंत्रालय (MEA) को सामने आना पड़ा। मंत्रालय ने साफ किया कि उनके प्रवक्ता के बयान को तोड़ा-मरोड़ा गया था और ऐसी कोई भी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई थी।

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