हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर सपने बड़े हैं और मेहनत सच्ची है, तो मंजिल जरूर मिलती है। यह शब्द सिर्फ एक जुमला नहीं, बल्कि कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में गोल्ड मेडल जीतने वाली मीराबाई चानू की जीवन यात्रा का सार हैं। मणिपुर के एक छोटे से गांव से ओलंपिक पोडियम तक का उनका सफर करोड़ों भारतीयों के लिए प्रेरणा बन चुका है।
8 अगस्त 1994 को मणिपुर के नोंगपोक काकचिंग गांव में जन्मीं साइखोम मीराबाई चानू का बचपन संघर्षों के बीच बीता। उनके पिता पीडब्ल्यूडी में थे, जबकि मां घर चलाने के साथ-साथ एक छोटी सी चाय की दुकान भी संभालती थीं। बचपन में ही मीराबाई ने वह शारीरिक ताकत दिखाई, जो अक्सर बड़ों में भी कम ही दिखती है। वे जंगलों से लकड़ी के भारी गट्ठर आसानी से उठा लिया करती थीं, जिन्हें उठाने में उनके भाइयों को भी पसीने छूट जाते थे।
मणिपुर की ही धाकड़ वेटलिफ्टर कुंजारानी देवी से प्रेरित होकर उन्होंने इंफाल के खुमान लम्पक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में ट्रेनिंग शुरू की। शुरुआत में सुविधाएं न के बराबर थीं और गांव से कॉम्प्लेक्स तक का सफर लंबा था, लेकिन मीराबाई ने हार नहीं मानी। अपनी तकनीक को निखारने पर उन्होंने जो जोर दिया, वही आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बना।
हर चैंपियन की तरह मीराबाई का रास्ता भी काटों भरा रहा। 2016 रियो ओलंपिक का वह दिन उनके करियर का सबसे निराशाजनक पल था, जब वे क्लीन एंड जर्क राउंड में एक भी सफल लिफ्ट नहीं कर पाईं और टूर्नामेंट से बाहर हो गईं। यह हार कोई अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत थी। उन्होंने अपनी मानसिक मजबूती और फिटनेस पर काम किया, जिसका नतीजा टोक्यो ओलंपिक में सिल्वर मेडल के रूप में सामने आया।
कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीन बार गोल्ड जीतना कोई तुक्का नहीं, बल्कि बरसों की तपस्या है। मीराबाई का अनुशासन ऐसा है कि वे बड़े मुकाबलों से पहले दो-दो दिन तक भोजन और पर्याप्त पानी से परहेज करती हैं, ताकि उनका वजन तय सीमा के भीतर बना रहे। यह बलिदान और अपने खेल के प्रति समर्पण ही उन्हें अन्य खिलाड़ियों से अलग बनाता है।
टोक्यो ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीतकर कर्णम मल्लेश्वरी के बाद मेडल लाने वाली दूसरी भारतीय वेटलिफ्टर बनीं मीराबाई चानू आज खेल की दुनिया का एक बड़ा नाम हैं। उनकी सफलता हमें सिखाती है कि टैलेंट से कहीं ज्यादा बड़ी चीज है—लगातार मेहनत करने का हौसला और कभी न झुकने वाला जज्बा। मीराबाई चानू केवल एक चैंपियन नहीं, बल्कि उन लाखों बच्चों के लिए उम्मीद की किरण हैं जो सीमित संसाधनों में भी बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।
MIRABAI CHANU WINS GOLD MEDAL AT THE COMMONWEALTH GAMES. 🇮🇳 pic.twitter.com/H4im7dYknt
— Mufaddal Vohra (@mufaddal_vohra) July 26, 2026
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