UP 2027: योगी-अखिलेश का मल्लयुद्ध शुरू, सैफई से लेकर बुलडोज़र तक सियासी घमासान
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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव का बिगुल भले ही औपचारिक रूप से न बजा हो, लेकिन सत्ता के गलियारों में बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच जंग अभी से चरम पर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव अब एक-दूसरे पर निशाना साधने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। यह सियासी मल्लयुद्ध अब व्यक्तिगत और प्रशासनिक आक्षेपों के इर्द-गिर्द सिमट गया है।

सैफई के जरिए अखिलेश पर योगी का सीधा प्रहार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को सपा के गढ़ सैफई में पहुंचकर अखिलेश यादव की प्रशासनिक क्षमता पर सवाल उठाए। उन्होंने सैफई मेडिकल कॉलेज का जिक्र करते हुए कहा कि मुलायम सिंह यादव ने इसके निर्माण का जो सपना देखा था, उसे उनके बेटे अखिलेश ने मुख्यमंत्री रहते हुए भी पूरा नहीं किया। योगी ने तंज कसा कि अखिलेश के पास अपने पिता के प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की फुर्सत ही नहीं थी।

490 करोड़ का दावा और श्रेय की जंग योगी आदित्यनाथ ने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार ने आने के बाद 490 करोड़ रुपये की लागत से 500 बेड वाले सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक को पूरा कराया। सीएम योगी की यह टिप्पणी सीधे तौर पर सपा के विकास के दावों की हवा निकालने और मुलायम सिंह के अधूरे कामों को पूरा करने का श्रेय खुद लेने की सोची-समझी रणनीति मानी जा रही है।

अखिलेश का बुलडोजर वाला तीखा पलटवार सीएम योगी के हमले के कुछ ही देर बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुख्यमंत्री की घेराबंदी की। उन्होंने बीजेपी नेता के घर सीएम योगी के दौरे का एक वीडियो साझा करते हुए सवाल पूछा, क्या ग्रीन बेल्ट में बने किसी के अवैधानिक घर का नक्शा देखे बिना ही मुख्यमंत्री जी वहां गए हैं?

दोहरा मापदंड और प्रशासनिक निरंकुशता का मुद्दा अखिलेश ने बिना नाम लिए आरोप लगाया कि सरकार विरोधियों के घरों पर बिना नोटिस और नक्शे की जांच के बुलडोजर चलाती है, लेकिन अपने करीबियों के निर्माण पर आंखें मूंद लेती है। सपा प्रमुख ने बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सरकार पर पिक-एंड-चूज़ की नीति अपनाने का गंभीर आरोप लगाया है।

2027 का सियासी गणित: क्या होगा आगे? यूपी का यह चुनावी समर अब पूरी तरह से आक्रामक हो चुका है। जहाँ सीएम योगी सैफई मॉडल की खामियों को उजागर कर सपा के परिवारवाद पर प्रहार कर रहे हैं, वहीं अखिलेश यादव सरकार की बुलडोजर नीति और भेदभावपूर्ण रवैये को मुद्दा बनाकर जनता के बीच पैठ बना रहे हैं। 2027 के महासंग्राम से पहले यह जुबानी जंग इस बात का साफ संकेत है कि आने वाले दिनों में यूपी की राजनीति का पारा और भी चढ़ने वाला है।

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