कॉर्पोरेट की चकाचौंध और 9-से-5 की सुरक्षित नौकरी को छोड़ना आज के दौर में एक बड़ा जोखिम माना जाता है। लेकिन, एक युवा ने टीसीएस (TCS) जैसी दिग्गज कंपनी के कैंपस प्लेसमेंट ऑफर को ठुकराकर जो मिसाल पेश की है, वह चर्चा का विषय बनी हुई है।
दोस्तों ने कहा गलती , उसने साबित किया हुनर जब उस युवक ने टीसीएस की नौकरी ठुकराई, तो परिवार और दोस्तों ने उसे करियर की सबसे बड़ी गलती बताया। लेकिन उसने लोगों की परवाह किए बिना अपनी राह खुद चुनी। कॉर्पोरेट डेस्क के बजाय, उसने गांवों का रुख किया और किसानों के साथ मिलकर एक मजबूत सप्लाई चेन नेटवर्क खड़ा किया।
बिचौलियों का अंत, सीधे खेती से जुड़ाव इस बिजनेस मॉडल की असली जान डायरेक्ट सोर्सिंग है। अंकित पांडे नाम के यूजर ने सोशल मीडिया पर बताया कि उनके दोस्त ने मार्केट के बिचौलियों को पूरी तरह बाहर कर दिया है। वह सीधे किसानों से चावल खरीदकर, उसे अपने ब्रांड के तहत पैक करवाता है और सीधे रिटेल दुकानों तक पहुंचाता है।
मुनाफे का गणित: 1 किलो पर 10 रुपये की बचत इस बिजनेस का गणित काफी सटीक है। एक किलो चावल की कुल लागत (खरीद + पैकेजिंग + ट्रांसपोर्ट) करीब 40 रुपये आती है। वह इसे रिटेलर्स को 50 रुपये में बेचता है, जिससे उसे हर किलो पर 10 रुपये का शुद्ध मुनाफा होता है।
20,000 किलो की सप्लाई और सालाना लाखों का टर्नओवर आज यह बिजनेस करीब 200 रिटेल दुकानों तक फैला है। प्रतिमाह 20,000 किलो (200 क्विंटल) चावल की सप्लाई के साथ, यह युवा सालाना लगभग 25 लाख रुपये की कमाई कर रहा है। वह अब न केवल आत्मनिर्भर है, बल्कि कई लोगों के लिए प्रेरणा भी बन चुका है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस इस वायरल पोस्ट ने इंटरनेट पर दो धड़े बना दिए हैं। एक वर्ग का मानना है कि जोखिम लेने में ही असली तरक्की है और अपना ब्रांड बनाना किसी भी नौकरी से बेहतर है। वहीं, दूसरा वर्ग मानता है कि बिजनेस का तनाव हर किसी के बस की बात नहीं है और कॉर्पोरेट नौकरी में मिलने वाली स्थिरता का अपना महत्व है।
तथ्य यह है कि सही विजन और ठोस प्लानिंग के साथ अगर मेहनत की जाए, तो पारंपरिक रास्तों को छोड़कर भी सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है।
My friend got a placement at TCS.
— Ankit Pandey (@iamankitpande) July 24, 2026
He rejected it.
Everyone said he was making the biggest mistake of his life.
Today, he earns around ₹25 lakh a year selling rice.
He buys rice directly from farmers across multiple villages and states, cleans it, packs it under his own… pic.twitter.com/93Ih45YckG
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