धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: राष्ट्रहित सर्वोपरि , भाजपा दिग्गजों ने बताया नैतिकता का बड़ा उदाहरण
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नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। नीट-यूजी परीक्षा में अनियमितताओं और पेपर लीक को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का लंबे समय से चल रहा आंदोलन आखिरकार एक बड़े राजनीतिक बदलाव के साथ समाप्त हुआ। प्रधान के इस फैसले को भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने नैतिकता और जवाबदेही की मिसाल बताया है।

राजनाथ सिंह बोले: छात्रों की चिंता हमारी प्राथमिकता

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने युवाओं और छात्रों की भावनाओं का सम्मान करते हुए यह पद छोड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पारदार्शिता के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सिंह ने कहा, यह फैसला दिखाता है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सरकार के लिए छात्रों का भविष्य सर्वोच्च प्राथमिकता है।

भाजपा नेतृत्व का मिला समर्थन

भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने प्रधान के कदम की सराहना करते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी के उच्चतम मानदंड स्थापित किए गए हैं। वहीं, महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि प्रधान ने व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को चुना, जो एक सच्चे भाजपा कार्यकर्ता की पहचान है।

दिल्ली और गोवा के मुख्यमंत्रियों ने की सराहना

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शिक्षा नीति (NEP 2020) के कार्यान्वयन में प्रधान के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में तकनीकी शिक्षा और भारतीय भाषाओं को जो विस्तार मिला, वह सराहनीय है। गोवा के सीएम प्रमोद सावंत ने भी प्रधान के चार दशक लंबे सार्वजनिक जीवन और उनके द्वारा उज्ज्वला योजना जैसी जनहितकारी पहलों का उल्लेख करते हुए आभार व्यक्त किया।

विपक्ष पर साधा निशाना

कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन की आड़ में कुछ असामाजिक तत्वों और विपक्षी दलों ने राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश की। उन्होंने दोहराया कि सरकार दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों के गठन पर काम कर रही है।

भविष्य की राह

केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू और भाजपा महासचिव विनोद तावड़े ने प्रधान की राजनीतिक यात्रा को छात्र कल्याण के प्रति समर्पित बताया। पार्टी नेताओं का मानना है कि धर्मेंद्र प्रधान का यह त्याग पत्र छात्रों के विश्वास को बहाल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि शिक्षा मंत्रालय की कमान किसे सौंपी जाएगी और नीट परीक्षा प्रणाली में सरकार क्या ठोस बदलाव लेकर आएगी।

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