IND vs ZIM: दूसरे टी-20 में टीम इंडिया के लिए खतरे की घंटी, जीत के बावजूद ये कमजोरी बनी सिरदर्द
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आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ मिली हार के सबक से सीखते हुए टीम इंडिया ने जिम्बाब्वे के खिलाफ पहले टी-20 में शानदार आगाज किया। बल्ले और गेंद दोनों से टीम ने अपना दबदबा दिखाया, लेकिन एक पुरानी बीमारी अब भी टीम के साथ बनी हुई है। अगर इसे समय रहते नहीं सुधारा गया, तो बड़ी टीमों के खिलाफ यह गलती भारी पड़ सकती है।

मिडल ओवरों में ढिलाई बनी समस्या पहले टी-20 में टीम इंडिया ने जिम्बाब्वे को 13.1 ओवर तक महज 64 रन पर 5 विकेट झटककर बैकफुट पर धकेल दिया था। लेकिन इसके बाद गेंदबाजों ने दबाव बनाने के बजाय राहत दे दी, जिसका नतीजा रहा कि जिम्बाब्वे 125 रनों तक पहुंचने में सफल रही।

यही स्थिति पहले आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ मैचों में भी देखी गई थी, जहां टीम इंडिया के हाथ से मैच फिसल गए थे। एक बार विरोधी टीम पर दबाव बनाने के बाद उसे पूरी तरह खत्म करना टीम की प्राथमिकता होनी चाहिए।

गेंदबाजों को दिखानी होगी आक्रामकता 25 जुलाई को हरारे में होने वाले दूसरे टी-20 मुकाबले में टीम इंडिया को अपनी रणनीति में बदलाव करना होगा। स्पिनर रवि बिश्नोई को बीच के ओवरों में अपनी लय और धार बरकरार रखनी होगी ताकि विपक्षी बल्लेबाजों को सेट होने का मौका न मिले।

साथ ही शिवम दुबे और अशोक शर्मा को भी पिछले मैच की तुलना में बेहतर गेंदबाजी करनी होगी। प्रिंस यादव और मयंक यादव जिस तरह से शुरुआती दबाव बना रहे हैं, उसी गति को पूरे मैच के दौरान बनाए रखना जरूरी है।

पिच का मिजाज और जीत का मंत्र हरारे की पिच पर रन बनाना किसी भी टीम के लिए आसान नहीं है, यहीं पर भारतीय गेंदबाजों के पास मौका है कि वे विपक्षी टीम को छोटे स्कोर पर समेटें। सीरीज में बढ़त बनाए रखने के लिए टीम इंडिया को मोमेंटम को टूटने नहीं देना होगा।

दूसरे टी-20 में जीत दर्ज करके टीम इंडिया सीरीज को सील करने के इरादे से मैदान पर उतरेगी। देखना दिलचस्प होगा कि क्या कप्तान अपनी टीम की इस कमजोरी को सुधारने में कामयाब होते हैं या नहीं।

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