दिल्ली के जंतर-मंतर पर आतंकियों की नजर: क्या छात्रों के प्रदर्शन की आड़ में रची जा रही है बड़ी साजिश?
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दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले एक महीने से नीट (NEET) पेपर लीक और छात्रों की आत्महत्या के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन जारी है। इस विरोध प्रदर्शन ने अब एक गंभीर मोड़ ले लिया है। सोमवार (20 जुलाई, 2026) को संसद चलो मार्च के दौरान हुई नारेबाजी और पथराव के बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा था।

हालांकि एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है और सरकार के साथ बातचीत का दौर शुरू हो गया है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां भारी अलर्ट पर हैं।

आतंकियों की रडार पर राजधानी खुफिया एजेंसियों और दिल्ली पुलिस को बेहद संवेदनशील इनपुट्स मिले हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सीमा पार बैठे आतंकवादी संगठनों की नजर जंतर-मंतर पर जारी इस प्रदर्शन पर टिकी है। आशंका है कि ये आतंकी देश का माहौल बिगाड़ने और शांति व्यवस्था को भंग करने के लिए किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की फिराक में हैं।

सुरक्षा के लिए डिजिटल पहरा इस खतरे को भांपते हुए दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली जिले की सुरक्षा को अभेद्य बनाने का फैसला किया है। इसके तहत जंतर-मंतर के आसपास फेशियल रिकॉगनिशन सिस्टम (FRS) कैमरे और वैन तैनात किए गए हैं। पुलिस का स्पष्ट तर्क है कि इसका मकसद प्रदर्शन में शामिल होने वाले संदिग्धों, वांटेड क्रिमिनल्स और असामाजिक तत्वों की पहचान करना है।

क्या जासूसी कर रही है दिल्ली पुलिस? पुलिस के इस कदम पर विवाद भी खड़ा हो गया है। प्रदर्शनकारी इसे छात्रों की जासूसी बताने के साथ-साथ डिजिटल निगरानी का नाम दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर कॉकरोच जनता पार्टी ने सवाल उठाया है कि जंतर-मंतर को एक ओपन-एयर जेल में बदला जा रहा है।

क्या है पुलिस का पक्ष? पुलिस सूत्रों के अनुसार, FRS कैमरों का उपयोग कोई नया प्रयोग नहीं है। गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस और प्रमुख त्योहारों (होली, दीपावली, ईद) के दौरान राजधानी में सुरक्षा के लिए इसी तकनीक का उपयोग किया जाता है। पुलिस का कहना है कि सुरक्षा सर्वोपरि है और इनका उद्देश्य किसी की निजता का उल्लंघन नहीं, बल्कि राष्ट्र विरोधी तत्वों को प्रदर्शन की आड़ में घुसने से रोकना है।

फिलहाल, सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत का दौर जारी है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह प्रदर्शन अब केवल विरोध तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक सुरक्षा चुनौती बन चुका है।

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