बलूचिस्तान में खूनी खेल की तैयारी: जनरल असीम मुनीर की नई धमकी, क्या फिर फटेगा बारूद?
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बलूचिस्तान एक बार फिर सुलगने की कगार पर है। इस्लामाबाद के सत्ता गलियारों से मिल रहे संकेत इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि पाकिस्तानी सेना बलूच विद्रोही गुटों—BLA और TTP—के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा और आक्रामक सैन्य अभियान छेड़ने जा रही है। रावलपिंडी स्थित सैन्य मुख्यालय में आयोजित नेशनल वर्कशॉप बलूचिस्तान में सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने इसके स्पष्ट संकेत दे दिए हैं।

नाकामी छिपाने के लिए फिर भारत कार्ड का इस्तेमाल

हर बार की तरह, इस बार भी अपनी आंतरिक विफलताओं को ढकने के लिए पाकिस्तानी सेना ने भारत को निशाना बनाया है। जनरल मुनीर ने बलूचिस्तान में जारी अलगाववादी आंदोलनों के पीछे विदेशी-समर्थित प्रॉक्सी होने का दावा किया है। हालांकि, उन्होंने सीधे नाम नहीं लिया, लेकिन इशारा साफ तौर पर भारत की ओर था।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बलूचिस्तान में चीनी हितों पर हो रहे हमलों से डरी पाकिस्तानी सेना अपनी साख बचाने के लिए इस पुराने और घिसे-पिटे नैरेटिव का सहारा ले रही है। भारत ने हमेशा की तरह इन आरोपों को निराधार और मनगढ़ंत बताते हुए खारिज किया है।

आम बलूचों के लिए नरक बनने वाला है सैन्य अभियान

सेना जिस अभियान को आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक जंग कह रही है, वह स्थानीय बलूचों के लिए खौफ का दूसरा नाम बन गया है। जमीनी रिपोर्टों के अनुसार, विद्रोहियों की तलाश के नाम पर सेना आम नागरिकों, महिलाओं और बच्चों को प्रताड़ित कर रही है। बलूच जनता का आरोप है कि पाकिस्तानी हुक्मरान उनके संसाधनों (सुई गैस और तांबा) का शोषण कर रहे हैं और विरोध करने पर हजारों युवाओं को जबरन गायब (Forced Disappearances) कर दिया जाता है।

चीन का दबाव और CPEC का डर

इस पूरे घटनाक्रम के पीछे चीन का हाथ होने की बात से इंकार नहीं किया जा सकता। बलूचिस्तान में चल रहे चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) और ग्वादर पोर्ट पर हो रहे हमलों ने बीजिंग की नींद उड़ा दी है। चीनी इंजीनियरों की सुरक्षा को लेकर मिल रहे कड़े दबाव के कारण ही जनरल मुनीर इतने आक्रामक रुख में हैं। मुनीर ने साफ कर दिया है कि जब तक विरोधियों का वजूद खत्म नहीं होता, यह अभियान नहीं रुकेगा।

क्या सैन्य कार्रवाई से निकलेगा समाधान?

मानवाधिकार संगठनों और स्थानीय कार्यकर्ताओं का तर्क है कि सैन्य कार्रवाई से समस्या हल होने के बजाय और जटिल होगी। जबरन गुमशुदगी और आम नागरिकों पर अत्याचार जैसे गंभीर मुद्दे बलूचिस्तान के गुस्से को और भड़का रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पाकिस्तान की इन कार्यवाहियों पर लगातार सवाल उठाए जाते रहे हैं।

अब सवाल यह है कि क्या यह ऑपरेशन ऑल आउट बलूचिस्तान की आजादी की आवाज को कुचल पाएगा, या फिर यह पाकिस्तानी सेना की ऐसी गलती साबित होगी, जो देश के और टुकड़े करने की पटकथा लिख दे? फिलहाल, दक्षिण एशिया की नजरें बलूचिस्तान की इन खूनी हलचलों पर टिकी हैं।

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