इराक में कोहराम: अमेरिकी सैन्य बेस पर मिसाइलों की बौछार, दहला इरबिल
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पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच शुक्रवार सुबह उत्तरी इराक का इरबिल शहर भीषण धमाकों से गूंज उठा। यहाँ अमेरिकी सेना की मौजूदगी वाले एक महत्वपूर्ण ठिकाने को निशाना बनाया गया है। इस हमले ने खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के खतरे को और बढ़ा दिया है।

सिलसिलेवार सात धमाकों से दहली जमीन

स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 9:30 बजे इरबिल के कुर्द क्षेत्र में एक के बाद एक सात जोरदार धमाके हुए। सूत्रों के अनुसार, हमला इतना सटीक था कि उसने अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के गोदामों को अपनी चपेट में ले लिया। धमाके के बाद इलाके में भीषण आग लग गई और आसमान में काले धुएं का गुबार छा गया। फिलहाल किसी के हताहत होने की आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है।

बंद हुआ हवाई यातायात

हमले के तुरंत बाद सुरक्षा कारणों से इरबिल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सभी उड़ानें अनिश्चितकाल के लिए रद्द कर दी गई हैं। क्षेत्र में दहशत का माहौल है और सैन्य ठिकाने के आसपास सुरक्षा घेरा और कड़ा कर दिया गया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य: टकराव की असली वजह

यह हमला अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव का ही हिस्सा है। दोनों देशों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य पर वर्चस्व की जंग छिड़ी है। यह मार्ग वैश्विक अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन है, जहाँ से दुनिया का 20 फीसदी तेल और गैस गुजरता है। अमेरिका ने हाल ही में ईरान की उन क्षमताओं को नष्ट करने का अभियान चलाया था, जिनका उपयोग वह समुद्री व्यापार को बाधित करने के लिए करता रहा है।

पड़ोसी देशों में अलर्ट, तेल की कीमतों में उछाल

इस तनाव का असर पूरे खाड़ी क्षेत्र पर पड़ रहा है। बहरीन ने सुरक्षा के मद्देनजर अपने नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी जारी की है। वहीं, लाल सागर में हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी तेल टैंकरों पर हमले के बाद कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिससे वैश्विक बाजारों में खलबली मच गई है।

शांति की कोशिशों में जुटे इराकी प्रधानमंत्री

इस बीच, इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने युद्ध को टालने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं। गुरुवार को तेहरान का दौरा करने वाले अल-जैदी ने ईरानी नेतृत्व से संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि इराक अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए नहीं होने देगा। अमेरिका और ईरान, दोनों के साथ बेहतर संबंध रखने वाले अल-जैदी इस संकट को सुलझाने के लिए मुख्य मध्यस्थ की भूमिका में हैं।

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