नीट (NEET) पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में जारी छात्र प्रदर्शन अब पूरी तरह से राजनीतिक रूप ले चुका है। गुरुवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने गांधी स्मृति पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया।
विरोध और श्रद्धांजलि का सियासी संदेश राहुल गांधी ने बस में सवार होते हुए कहा कि जब छात्र सड़क पर हैं, तो विपक्ष का भी उनके साथ होना जरूरी है। इंडिया गठबंधन के नेताओं ने इंडिया गेट जाने की अनुमति न मिलने के बाद महात्मा गांधी की स्मृति स्थली का रुख किया। वहां उन्होंने उन छात्रों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने नीट पेपर लीक के तनाव में अपनी जान गंवाई। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि पूरा विपक्ष छात्रों की इस न्याय की लड़ाई में उनके साथ खड़ा है।
क्या है गांधी स्मृति ? दिल्ली के 30 जनवरी लेन पर स्थित गांधी स्मृति को पहले बिरला हाउस के नाम से जाना जाता था। यह वही ऐतिहासिक स्थल है जहां महात्मा गांधी ने अपने जीवन के अंतिम 144 दिन बिताए थे और 30 जनवरी 1948 को उनकी हत्या की गई थी। 2005 में इसे एक भव्य म्यूजियम का रूप दिया गया।
इतिहास के पन्नों में बिरला हाउस इस घर का निर्माण 1928 में उद्योगपति घनश्यामदास बिरला ने करवाया था। 1966 में केके बिरला ने इसे भारत सरकार को बेच दिया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार ने इसके बदले 54 लाख रुपये और दिल्ली के प्राइम लोकेशन पर 7 एकड़ जमीन दी थी। 15 अगस्त 1973 को इसे औपचारिक रूप से गांधी स्मृति के नाम से जनता के लिए खोल दिया गया।
म्यूजियम की खासियत आज यह स्थान महात्मा गांधी के जीवन और उनकी विचारधारा को संजोए हुए है। गांधीजी का कमरा आज भी वैसा ही है, जैसा 1948 में था। वहां उनका चश्मा, छड़ी, गीता की प्रति और बिस्तर जैसी वस्तुएं हूबहू रखी गई हैं।
जिस स्थान पर गांधीजी को गोली मारी गई थी, वहां एक शहीद स्तंभ बनाया गया है जिस पर हे राम अंकित है। म्यूजियम के साउथ और नॉर्थ विंग में गांधीजी के मोहनदास से महात्मा बनने तक के सफर और उनके अंतिम घंटों को तस्वीरों और फिल्मों के माध्यम से दर्शाया गया है। यह स्थल सोमवार को छोड़कर रोजाना सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक आम जनता के लिए खुला रहता है।
नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi समेत विपक्ष के सांसदों ने गांधी स्मृति में उन छात्रों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनकी जान NEET पेपर लीक की वजह से गई।
— Congress (@INCIndia) July 23, 2026
वे बच्चे हमारी यादों में जिंदा रहेंगे।
हम उनके लिए न्याय की लड़ाई लड़ेंगे। pic.twitter.com/VIcKKZNzkN
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