क्या म्यूचुअल फंड के चक्कर में आप अपना भविष्य दांव पर लगा रहे हैं? जानें EPFO की ये चेतावनी
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बीते कुछ समय में शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड के उतार-चढ़ाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच, एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (EPFO) ने नौकरीपेशा लोगों को एक बड़ी सलाह दी है। EPFO ने साफ कहा है कि म्यूचुअल फंड में निवेश के लालच में अपनी PF की बचत को कभी न निकालें।

क्यों खास है EPF?

EPFO का तर्क है कि प्रोविडेंट फंड महज एक बचत खाता नहीं है, बल्कि यह एक कानूनी सामाजिक सुरक्षा योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य रिटायरमेंट के बाद वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है। वहीं, म्यूचुअल फंड पूरी तरह से बाजार के जोखिमों पर आधारित स्वैच्छिक निवेश हैं।

दोनों में बड़ा अंतर क्या है?

EPFO के अनुसार, EPF और म्यूचुअल फंड की तुलना करना गलत है।

रिटायरमेंट के साथ सुरक्षा कवच

EPF में मिलने वाले लाभ केवल ब्याज तक सीमित नहीं हैं। इसके साथ मिलने वाली एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम (EPS) रिटायरमेंट के बाद जीवन भर पेंशन का भरोसा देती है। साथ ही, एम्प्लॉइज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस (EDLI) के तहत सदस्य की असामयिक मृत्यु होने पर परिवार को 7 लाख रुपये तक का बीमा कवर भी मिलता है। म्यूचुअल फंड में ये सुविधाएं नहीं मिलतीं।

क्या कहता है EPFO का फॉर्मूला ?

EPFO का मानना है कि जो लोग म्यूचुअल फंड के लिए PF का पैसा निकालते हैं, वे अपनी भविष्य की सुरक्षा को कमजोर करते हैं। संस्था ने समझदार को EPF काफी है का मंत्र देते हुए कहा कि EPF बचत का एक अनुशासित और सुरक्षित जरिया है।

निवेशकों के लिए अहम सलाह

विशेषज्ञों और EPFO का स्पष्ट मानना है कि अगर आप जोखिम ले सकते हैं, तो पोर्टफोलियो में म्यूचुअल फंड शामिल करें, लेकिन इसे EPF का विकल्प न बनाएं। PF आपकी बुढ़ापे की लाठी है, जबकि म्यूचुअल फंड केवल वेल्थ क्रिएशन का एक तरीका। अपनी रिटायरमेंट प्लानिंग की बुनियाद को बाजार के भरोसे छोड़ना समझदारी नहीं है।

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