नई दिल्ली: नीट (NEET) परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के युवाओं के प्रति संदेश और कड़ी कार्रवाई के वादे के तुरंत बाद, कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर सीधा हमला बोला है।
पीएम का सख्त संदेश और दीपके का तंज प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर स्पष्ट किया कि सरकार के लिए युवाओं का भविष्य सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। इसके साथ ही, उन्होंने पेपर लीक के दोषियों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का भी ऐलान किया।
पीएम के इस संदेश के कुछ ही देर बाद, अभिजीत दीपके ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की। इस तस्वीर के साथ उन्होंने कैप्शन लिखा- Hi, मेरा नाम कुछ नहीं है। यह तंज सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है।
संसद चलो मार्च और बढ़ा तनाव यह विवाद तब और गहरा गया जब 20 जुलाई को कॉजपा के नेतृत्व में हजारों छात्रों ने दिल्ली में संसद चलो मार्च निकाला। छात्रों की मांग सीधे तौर पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी। स्थिति उस समय बिगड़ गई जब पुलिस और प्रदर्शनकारी आमने-सामने आ गए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े, जिसमें कई छात्र घायल हो गए। पुलिस का दावा है कि इस दौरान 100 से अधिक पुलिसकर्मी भी जख्मी हुए हैं।
सरकार की सफाई और कार्रवाई का दावा इस मामले पर अपनी बात रखते हुए प्रधानमंत्री ने संसदीय दल की बैठक में नीट पेपर लीक को घोर पाप करार दिया। सरकार की ओर से पेश आंकड़ों के अनुसार, इस मामले में अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
सरकार का तर्क है कि छात्रों का भविष्य सुरक्षित रखने के लिए ही नीट की दोबारा परीक्षा कराई गई और त्वरित परिणाम घोषित किए गए। सरकार का कहना है कि वे इस मामले में राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित में कड़े कदम उठा रहे हैं।
विपक्ष का दबाव लगातार जारी नीट परीक्षा को लेकर पूरे देश में छात्रों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक तरफ सरकार जहां अपनी त्वरित कार्रवाई और सुधारों का हवाला दे रही है, वहीं दूसरी तरफ अभिजीत दीपके जैसे नेताओं और छात्र संगठनों का यह सत्याग्रह सरकार की मुश्किलें बढ़ा रहा है। अब देखना यह होगा कि क्या फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए दोषियों को सजा मिलने से यह गुस्सा शांत हो पाएगा या प्रदर्शन का दौर अभी और चलेगा।
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— Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) July 23, 2026
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