नीट विवाद: जेपी नड्डा को दो टूक जवाब देने वाले सौरव दास कौन हैं?
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दिल्ली में NEET परीक्षा में कथित धांधली को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का नाम सुर्खियों में है। इस आंदोलन में सबसे ज्यादा चर्चा CJP के मुख्य प्रवक्ता और स्वतंत्र खोजी पत्रकार सौरव दास की हो रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के आमंत्रण को यह कहते हुए अस्वीकार करना कि वार्ता केवल जंतर-मंतर पर होगी , सौरव दास के कड़े रुख को दर्शाता है।

खोजी पत्रकारिता और RTI से बनाई पहचान

दिल्ली के निवासी सौरव दास ने 2017 में महज 18 साल की उम्र में RTI (सूचना का अधिकार) का इस्तेमाल कर बड़े खुलासे करने शुरू किए थे। पत्रकारिता में स्नातक सौरव ने महामारी के दौरान RTI अपीलों के निपटारे के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसके बाद केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) को सक्रिय होना पड़ा था। इसके अलावा आरोग्य सेतु ऐप और JNU हिंसा मामले पर उनके द्वारा मांगी गई जानकारी ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

बड़े मीडिया संस्थानों में कलम का जलवा

सौरव दास एक पेशेवर पत्रकार के तौर पर द कारवां , अल जजीरा , द वायर और द हिंदू जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में लिख चुके हैं। उन्होंने द वायर के लिए द जस्टिस ब्रीफ शो होस्ट किया था। हाल ही में, पूर्व CJI डी.वाई. चंद्रचूड़ पर लिखा उनका 16,000 शब्दों का क्रिटिकल प्रोफाइल खासी चर्चा में रहा था। वर्तमान में वह Complicit Silence नामक किताब पर काम कर रहे हैं, जो भारतीय न्यायपालिका की कार्यप्रणाली पर केंद्रित है।

उमर खालिद से मुलाकात और विवादों से नाता

सौरव दास का नाम उस समय भी चर्चा में आया था जब उन्होंने तिहाड़ जेल में बंद उमर खालिद से मुलाकात की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की थी। इसके बाद उन पर वैचारिक पक्षपात के आरोप लगे। हालांकि, सौरव ने स्पष्ट किया है कि उनका किसी राजनीतिक दल से कोई औपचारिक संबंध नहीं है। वह अक्सर सरकारी नीतियों और न्यायिक फैसलों पर तीखी टिप्पणी करने के लिए जाने जाते हैं।

CJP के मुख्य प्रवक्ता के रूप में भूमिका

जून 2026 में CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सौरव दास को मुख्य प्रवक्ता नियुक्त किया। उनके कानूनी मामलों की समझ और सामाजिक मुद्दों पर पत्रकारिता के अनुभव को देखते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई। आज सौरव न केवल CJP का चेहरा हैं, बल्कि छात्र आंदोलन की मांगों को सरकार के सामने मजबूती से रखने वाले मुख्य रणनीतिकार के तौर पर भी देखे जा रहे हैं।

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