भारतीय वायुसेना की हवाई निगरानी क्षमता को अभूतपूर्व स्तर पर ले जाने के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब छह कमर्शियल एयरबस A321 विमानों को अत्याधुनिक एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C Mk-II) सिस्टम में बदला जाएगा। यह प्रोजेक्ट भारत की हवाई सुरक्षा की नई तीसरी आंख साबित होगा।
क्या है यह महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट? इस प्रोजेक्ट के लिए डीआरडीओ ने अदाणी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज और एआई इंजीनियरिंग सर्विसेज लिमिटेड (AIESL) के साथ महत्वपूर्ण समझौते किए हैं। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में हस्ताक्षरित इस डील के तहत, जो विमान पहले यात्रियों को ढोते थे, उन्हें अब मिलिट्री सर्विलांस के खतरनाक हथियारों में तब्दील किया जाएगा।
कैसे काम करेंगे उड़ते हुए कमांड सेंटर ? डीआरडीओ का सेंटर फॉर एयर बोर्न सिस्टम्स (CABS) इस मिशन का नेतृत्व कर रहा है। AIESL विमानों के स्ट्रक्चरल मोडिफिकेशन का काम संभालेगी, जबकि अदाणी डिफेंस मिशन सिस्टम्स को विकसित करेगी। ये विमान हवा में उड़ते हुए कमांड और कंट्रोल सेंटर की तरह काम करेंगे, जो दुश्मन की हर गतिविधि को भांपने में सक्षम होंगे।
सैकड़ों किलोमीटर दूर से ही होगी दुश्मन की पहचान AEW&C विमानों को आधुनिक वायुसेना की आंख और कान कहा जाता है। ये सिस्टम सैकड़ों किलोमीटर दूर से ही दुश्मन के फाइटर जेट्स, मिसाइल लॉन्च और समुद्री गतिविधियों को ट्रेस कर सकते हैं। ये न केवल दुश्मन की लोकेशन बताएंगे, बल्कि रियल-टाइम डेटा को कमांड मुख्यालय और फाइटर जेट्स तक पहुंचाएंगे, जिससे पलक झपकते ही जवाबी कार्रवाई संभव होगी।
आत्मनिर्भर भारत के लिए बड़ा गेम चेंजर यह प्रोजेक्ट केवल निगरानी विमान बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की स्वदेशी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को एक नया आयाम देगा। एयरबस द्वारा उपलब्ध कराए गए विमानों पर स्वदेशी मिशन सिस्टम्स को इंटीग्रेट करना भारत की अपनी इंजीनियरिंग कुशलता को दर्शाता है। यह प्राइवेट और सार्वजनिक क्षेत्र के बीच तालमेल का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो भविष्य में भारत को रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भर बनाने की राह आसान करेगा।
सुरक्षा का नया चक्रव्यूह इन विमानों के बेड़े में शामिल होने के बाद भारतीय वायुसेना दूर-दराज के इलाकों में भी 24x7 नजर रख सकेगी। दुश्मन अब देश की सीमा के करीब आने से पहले सौ बार सोचेगा, क्योंकि भारतीय वायुसेना की ये नई आंखें किसी भी चाल को नाकाम करने के लिए पूरी तरह तैयार होंगी।
Strengthening India’s defence ecosystem through indigenous Innovation, DRDO today entered in partnership with M/s AI Engineering Services Ltd( AIESL) and M/s Adani Defence Services & Technologies Ltd ( ADSTL) for development and production of Airborne Early Warning and Control… pic.twitter.com/2RO8Zsi7bE
— DRDO (@DRDO_India) July 22, 2026
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