राहुल गांधी के साथ गलबहियां, फिर सदन में समझौता का आरोप: अखिलेश यादव का 24 घंटे में बदला रुख?
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लखनऊ: पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार को घेरने के लिए सड़क से संसद तक एक साथ दिखे राहुल गांधी और अखिलेश यादव के रिश्तों में क्या खटास आ गई है? महज 24 घंटे के भीतर अखिलेश यादव के तेवर और बयानों ने दिल्ली से लेकर लखनऊ तक सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है।

सड़क पर दोस्ती, संसद में तकरार मंगलवार को पीएम आवास के बाहर राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव को एक साथ प्रदर्शन करते देखा गया था। उस तस्वीर ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए इंडिया गठबंधन की मजबूती का संदेश दिया था। यहां तक कि गठबंधन के प्रदर्शन को सफल बनाने में सपा कार्यकर्ताओं ने बड़ी भूमिका निभाई थी।

अखिलेश का तीखा हमला बुधवार को तस्वीर पूरी तरह बदल गई। लोकसभा में पेपर लीक पर बहस के मुद्दे पर जब कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को चर्चा की शर्त बनाया, तो अखिलेश यादव बिफर पड़े। उन्होंने सदन में कहा, यह मुद्दा किसी पार्टी का नहीं, छात्रों का है। आपने इनको बोलवा दिया, उनको बोलवा दिया, समझौता कर लिया क्या? मुझे बोलने का मौका क्यों नहीं दिया?

राजनीति के पीछे की असली वजह राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अखिलेश यादव और राहुल गांधी के बीच कोई गहरी तकरार नहीं है, बल्कि यह पूरा मामला क्रेडिट वॉर का है। समाजवादी पार्टी शुरू से ही पेपर लीक के खिलाफ छात्रों के आंदोलन के साथ खड़ी है। डिंपल यादव का जंतर-मंतर जाकर घायल छात्रों की सेवा करना और संसद मार्च में मजबूती से खड़े रहना यह साबित करता है कि सपा इस मुद्दे पर अपनी पकड़ ढीली नहीं करना चाहती।

सफाई और सियासी संतुलन सदन के बाहर आने के बाद अखिलेश यादव ने खुद अपने बयान पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनके और केसी वेणुगोपाल के बीच कोई मनमुटाव नहीं है, यह केवल फ्लोर कोऑर्डिनेशन (संसदीय तालमेल) का विषय है जिसे और बेहतर किया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा ही उनकी एकमात्र मांग है।

गठबंधन पर संशय के बादल क्यों? अखिलेश के इस बयान से पहले यूपी कांग्रेस के नेताओं के लगातार सपा पर विवादास्पद बयानों ने भी गठबंधन के भीतर तनाव पैदा किया था। सहारनपुर सांसद इमरान मसूद का चुनावी श्रेय राहुल को देना और कांग्रेस प्रभारी का बराबर सीटों की मांग करना सपा को नागवार गुजरा है। बहरहाल, अखिलेश की नाराजगी यह साफ संदेश देती है कि वे गठबंधन में किसी भी स्तर पर अपनी साख या छात्रों के मसीहा वाली छवि को कांग्रेस के आगे झुकते नहीं देखना चाहते।

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