बर्गर विवाद पर विजेता दहिया का बड़ा खुलासा: आंदोलन बचाने के लिए मुझे बनाया गया बलि का बकरा
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दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के समर्थन में चल रहे प्रदर्शन और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से अपने निष्कासन को लेकर विजेता दहिया सुर्खियों में हैं। संसद मार्च के दौरान उनका बर्गर खाते हुए एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसके बाद पार्टी ने उन्हें प्रवक्ता पद से हटा दिया। अब विजेता ने पूरे मामले पर चुप्पी तोड़ते हुए इसे प्रोपेगेंडा बताया है।

दो रात नहीं सोया था, भूख बर्दाश्त से बाहर थी विजेता का कहना है कि वे पिछले 50 दिनों से आंदोलन के लिए समर्पित थे। मार्च से पहले वे 48 घंटों से नहीं सोए थे और लगातार सुरक्षा व भीड़ प्रबंधन में जुटे थे। उन्होंने सफाई दी, यह संवेदनहीनता नहीं, बल्कि प्रोपेगेंडा की पराकाष्ठा है। पुलिस कभी भी क्रैकडाउन कर सकती थी, इसलिए मैं लगातार साइट पर पहरा दे रहा था। भूख और थकान के कारण मैंने कुछ खाया, जिसे गलत तरीके से पेश किया गया।

इंटरनेट बंद था, मुझे हालात का अंदाजा नहीं था संसद मार्च के दौरान हिंसा और लाठीचार्ज पर बात करते हुए विजेता ने कहा कि उस समय इंटरनेट बंद था, इसलिए उन्हें बाहरी स्थितियों की जानकारी नहीं थी। उन्होंने बताया, पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े थे। मुझे लगा कि मैं घर जाकर जल्दी फ्रेश होकर वापस आ जाऊं ताकि स्टेज और भीड़ का मोर्चा संभाल सकूं। सब कुछ मैंने आंदोलन के हित में सोचा था।

पार्टी के फैसले पर दुख, लेकिन आंदोलन सर्वोपरि क्या उन्हें लगता है कि पार्टी ने उन्हें बलि का बकरा बनाया है? इस पर विजेता ने कहा, आप ऐसा कह सकते हैं कि आंदोलन को बचाने के लिए मुझे बलि का बकरा बनाया गया। एक प्रवक्ता का पद क्या है? अगर आंदोलन की भलाई के लिए पद छोड़ना पड़े, तो मुझे कोई परवाह नहीं।

मैं अभी भी आंदोलन का हिस्सा हूं विजेता ने स्पष्ट किया कि भले ही उन्हें पद से हटा दिया गया हो, लेकिन वे अभी भी पार्टी और आंदोलन के साथ खड़े हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब वे कोई निर्वाचित नेता नहीं हैं, तो उनसे इस्तीफे की मांग क्यों की गई? विजेता ने जोर देकर कहा कि वे मनुवादियों के आगे झुकने में विश्वास नहीं रखते और आंदोलन के लिए किसी भी तरह का बलिदान देने को तैयार हैं।

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