कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: क्या मेडल मशीन वाले खेलों के हटने से भारत की चमक फीकी पड़ जाएगी?
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स्कॉटलैंड के ग्लासगो में 23 जुलाई से 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स का आगाज होने जा रहा है। भारत के 125 खिलाड़ी इन खेलों में अपना दम दिखाने के लिए तैयार हैं। हालांकि, इस बार का सफर पिछली बार की तरह आसान नहीं होगा।

सिर्फ 10 खेल, भारत के लिए बढ़ा संकट बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में 19 खेल शामिल थे, लेकिन ग्लासगो में केवल 10 खेलों का आयोजन होगा। इसका सीधा असर भारत की पदक तालिका पर पड़ेगा, क्योंकि जिन खेलों को बाहर किया गया है, उनमें भारत का दबदबा रहा है।

मुख्य खेल जो इस बार नहीं होंगे:

पदक तालिका पर पड़ेगा भारी असर पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने कुल 61 पदक जीते थे। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 30 पदक (13 गोल्ड सहित) उन्हीं खेलों से आए थे जिन्हें इस बार हटा दिया गया है। कुश्ती (12 पदक) और टेबल टेनिस (7 पदक) जैसे खेलों का बाहर होना भारत के लिए एक बड़ा झटका है।

सितारों की कमी खेलों के कम होने से कई बड़े भारतीय सितारे भी हिस्सा नहीं ले पाएंगे। पीवी सिंधु, मनु भाकर, हरमनप्रीत सिंह और अमन सहरावत जैसे दिग्गजों को इस बार कॉमनवेल्थ का मंच नहीं मिलेगा।

क्यों छोटा है इस बार का आयोजन? 2026 खेलों की मेजबानी पहले ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया के पास थी, लेकिन बढ़ते खर्च के कारण उन्होंने नाम वापस ले लिया। बाद में ग्लासगो ने जिम्मेदारी संभाली, लेकिन कम समय और सीमित बजट के कारण आयोजकों ने स्मार्ट और छोटे आयोजन का फैसला किया। नए स्टेडियम बनाने के बजाय मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर और होटलों का उपयोग किया जाएगा।

क्या चुनौतियां केवल खेलों के हटने तक सीमित हैं? नहीं, मौजूदा फॉर्म भी चिंता का विषय है। वेटलिफ्टिंग और बॉक्सिंग जैसे खेलों में, जिनमें भारत ने 2022 में शानदार प्रदर्शन किया था, वहां पेरिस ओलंपिक 2024 के बाद से भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन बहुत स्थिर नहीं रहा है। मीराबाई चानू, लवलीना बोरगोहेन और निखत ज़रीन जैसे बड़े नामों को इस बार कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

उम्मीदें अब भी बरकरार चुनौतियों के बावजूद, भारत के पास स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ी मौजूद हैं। स्टार भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा और वेटलिफ्टिंग में मीराबाई चानू पर सबकी निगाहें होंगी। साथ ही, पैरा-एथलेटिक्स में भारत के प्रदर्शन से काफी उम्मीदें हैं।

अगला पड़ाव: 2030 की मेजबानी भारत के लिए यह टूर्नामेंट सीखने का एक अवसर है। भारत 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करेगा, जो अहमदाबाद में आयोजित होंगे। ग्लासगो के बाद अब खिलाड़ियों का पूरा फोकस सितंबर में होने वाले एशियन गेम्स पर शिफ्ट हो जाएगा, जहाँ भारत उन खेलों में वापसी करेगा जो इस बार कॉमनवेल्थ से बाहर हैं।

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